: गुरु के बिना परमात्मा मिलना संभव नहीं,मुनिश्री निष्कम्पसागर जी महाराज
गुरु के बिना परमात्मा मिलना संभव नहीं,मुनिश्री निष्कम्पसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री निष्कम्पसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा एक घास के तिनके की इच्छा थी सागर में जाकर मिलने की ।यात्रा प्रारंभ करता है हवा का झोंका उसका प्रयास सफल नहीं होने देता। कई बार उसने प्रयास किया मैं सागर से मिलूं जैसे ही वह यात्रा प्रारंभ करता हवा का एक झोका आता उसके प्रयासों को असफल कर देता ।सामने बैठा हुआ एक पथिक बहुत देर से यह दृश्य देख रहा था उसने तिनके से पूछा तुम क्या कर रहे हो तिनके ने कहा मैं सागर से मिलना चाहता हूं पर यात्रा विफल हो जाती है। मैं इतना पुरुषार्थ कर रहा हूं मेरा पुरुषार्थ कोई काम नहीं आ रहा। उस पथिक ने कहा तुम्हारा यह पुरुषार्थ ठीक नहीं । तुम सागर से मिलना चाहते हो बन्धुओं कभी-कभी मनुष्य पुरुषार्थ तो करता है पर पुरुषार्थ करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं होती। पुरुषार्थ तो कर रहा है पर पुरुषार्थ सही दिशा में नहीं हो रहा। सही दिशा में करें तो उसे सफलता जरूर प्राप्त होगी। लेकिन हमारा जो पुरुषार्थ है असफल इसलिए होता है कि हमारा पुरुषार्थ सही दिशा में नहीं होता ।कई लोग कहते हम पुरुषार्थ करते पर सफलता प्राप्त नहीं हो रही। एक बार लोगों ने कहा हमारे यहां जल की कमी है हम जिनेंद्र भगवान का अभिषेक नहीं कर पाते कुएं का शुद्ध जल प्राप्त नहीं होता। हम जिनेंद्र भगवान का अभिषेक कैसे करें। जैन दर्शन में कहा है बोरिंग के पानी से अभिषेक नहीं होना चाहिए ।साधुओं का आहार भी बोरिंग के पानी से नहीं होना चाहिए। क्यों नहीं होना चाहिए कुएं का पानी भी नीचे से आ रहा है और बोरिंग का पानी भी नीचे से आ रहा है ।जैन दर्शन में पानी छानने का नहीं बिल्छानी का महत्व है। कुएं के पानी की विल छानी यथा स्थान पहुंचेगी बोरिंग के पानी की नहीं पहुंचेगी। महाराज जी ऐसा आशीर्वाद दो कुएं के जल की व्यवस्था हो जाए। इस स्थान पर जल की प्राप्ति हो सकती है 100 फीट गड्ढा खोदो महाराज ने कहा। हम कल आएंगे देखेंगे। दूसरे दिन महाराज जी के पास वह व्यक्ति उदास बैठा था बोला हमने इतना पुरुषार्थ किया पर पानी की प्राप्ति नहीं हुई ।दिगंबर साधु झूठ नहीं बोलते आपने कहा था पानी की प्राप्ति होगी। हां दिगंबर साधु का वचन झूठ नहीं होता तुमने पुरुषार्थ तो किया एक-एक फीट के सौ गड्ढे खोद दिए तुम्हारा पुरुषार्थ सफल नहीं हो पाया। ऐसा ही उस पथिक ने तिनके से कहा तुम्हें रास्ता बताता हूं तुम सागर से मिल सकोगे ।तुम्हारे बगल से जो गंगा नदी जा रही है तुम इसमें डुबकी लगा लो। तुम्हारी सागर से मिलने की यात्रा पूरी होगी ।उसने पथिक की बात मानी और तिनके ने नदी में डुबकी लगाई और सागर तक की यात्रा कर ली ।इस दृष्टांत के माध्यम से बताना चाहता हूं गुरु रूपी गंगा में डुबकी लगाना पड़ेगी और परमात्मा की प्राप्ति हो सकेगी। जो गुरु की अवहेलना करते उन्हें गुरु के बिना परमात्मा मिलने वाला नहीं है ।गुरु के माध्यम से ही तुम्हें परमात्मा मिल सकते हैं। बिना गुरु के परमात्मा मिलना तीन काल में भी संभव नहीं है।
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