: गाडरवारा,महेश अधरुज को सेवानिवृत्ति पर दीं विदाई
Fri, Aug 29, 2025
महेश अधरुज को सेवानिवृत्ति पर दीं विदाई
गाडरवारा। गत दिवस समीपी ग्राम बोदरी की शासकीय प्राथमिक शाला में सहायक शिक्षक महेश अधरुज का शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर विदाभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा विद्या की देवी माँ सरस्वती के चित्र का पूजन कर किया गया। तदोपरांत श्री अधरुज सहित अतिथियों का स्वागत माला पहनाकर एवं पुष्प गुच्छ देकर किया गया। इस अवसर पर श्री अधरुज को शाल, श्रीफल, विदाभिनंदन पत्र एवं उपहार देकर विदाई दी गई। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि श्री अधरुज ने अपने सेवाकाल में अच्छे कार्य किये। सहायक संचालक सुश्री सीमा डोंगरे ने कहा कि शासकीय सेवा में सेवा निवृत्ति एक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस कार्यक्रम को अनेक वक्ताओ ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नगेन्द्र त्रिपाठी एवं आभार प्रदर्शन शिक्षक अमित जैन ने किया। इस आयोजन में भाजपा नेता अशोक भार्गव, सेवानिवृत प्राचार्य राजेश बरसैयां, आरती पाठक,अनूप शर्मा, प्राचार्य प्रतुल इंदुरख्या, सुनीता पटैल, एस के मिश्रा, जयमोहन शर्मा, सुशील शर्मा, लेखा कौरव, बीआरसी संदीप स्थापक, महेश तिवारी, विनोद कौरव, अनिल स्थापक अमिकांत जैन,बीएसी पवन राजोरिया, सीएसी देवी सिंह कीर, प्रदीप मालवीय, सिराज अहमद सिद्धिकी, मधुसूदन पटैल, पंकज स्थापक, मंजूलता मेहरा, विद्या शर्मा, प्रतिभा तिवारी, प्रीति विश्वकर्मा सहित ग्राम सरपंच भाईजी कहार, शिवकुमार कहार, सचिव बलराम कौरव, रामपाल राजपूत एवं छात्र छात्राएँ उपस्थित रहे। विदित हो कि श्री अधरुज को शासकीय प्राथमिक शाला बरेली से भी स्कूल स्टॉफ ने विदाई दी।
: सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर मे पर्वराज दशलक्षण महापर्व की धूम
Fri, Aug 29, 2025
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर मे पर्वराज दशलक्षण महापर्व की धूम
कुण्डलपुर।सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में महासमाधिधारक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पर्वराज दशलक्षण महापर्व पर विविध धार्मिक आयोजनों के साथ दशलक्षण महापर्व 28 अगस्त से हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पर्वतराज पर स्थित पूज्य बड़े बाबा मंदिर में प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश, पूजन, विधान हो रहा है। विद्याभवन में प्रातः अभिषेक पूजन का कार्यक्रम , दोपहर में स्थानीय विद्याभवन में कुण्डलपुर जैन समाज के श्रावक परिवारों द्वारा दशलक्षण के 10 दिन अलग-अलग विधान का आयोजन भक्ति भावपूर्वक किया जा रहा है। उत्तम क्षमा के प्रथम दिवस प्रथम अभिषेक, शांतिधारा ,रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य संभव शरद अर्हम जैन जबलपुर, डॉ हेमंत रमेश जैन अर्हम सोसायटी बड़ोदिया बांसवाड़ा, सुभाष राकेश मेहता बांसवाड़ा, सुशीला ठौरा परिवार कोटा, रजत आशीष नमन जैन बड़ोत कृतज्ञ उत्संग अखिलेश जैन फट्टा दमोह के साथ श्रद्धालु भक्तों ने प्राप्त किया। दोपहर में विद्या भवन में विधान पुन्यार्जक परिवार आशीष जैन हैप्पी कुण्डलपुर के साथ श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता दर्ज की। विधान ब्रह्मचारी मनोज भैया दमोह ,अनिल पुजारी जी कुण्डलपुर के द्वारा कराया जा रहा है। द्वितीय दिवस उत्तम मार्दव दिवस के दिन प्रथम अभिषेक, शांति धारा, रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य मनोज धर्मेंद्र जैन सिरसागंज, संभव शरद जैन जबलपुर, कमल अतिशय अंशुल शहडोल, विनीत मोहनलाल शाह पुणे, अमर अतिशय विवान जैन दमोह ,आशीष लालचंद अनिल लुहाड़िया भिलाई के साथ श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक में भाग लिया। दोपहर में विद्या भवन में विधान पुन्यार्जक परिवार संतोष जैन कुण्डलपुर एवं डॉ. संदेश जैन कुण्डलपुर के साथ श्रद्धालु भक्तों ने विधान में भाग लिया।सायंंकाल में आरती पुण्यार्जक परिवार के द्वारा एवं प्रवचन ब्रह्मचारिणी दीदी कर्नाटक द्वारा हो रहे हैं। बड़े बाबा मंदिर में सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हो रही है।
: गाडरवारा,माहेश्वरी समाज ने ऋषि पंचमी पर रक्षा बंधन मनाया
Fri, Aug 29, 2025
माहेश्वरी समाज ने ऋषि पंचमी पर रक्षा बंधन मनाया
गाडरवारा ।भारतीय जनजीवन में अनेक सांस्कृतिक सामाजिक और सांस्कृतिक लोकपरम्पराओ के संवर्धन की दिशा में अनेक पावन पर्व मनाये जाते हैं इसी श्रृंखला में माहेश्वरी समाज भगवान शिव के वंशज वंशोत्पत्ति से जुड़े और अपने गुरु ऋषियों के प्रति श्रृध्दा और समर्पित भाव से भादो माह शुक्ल पक्ष की पंचमी को श्रावणी पूर्णिमा के बजाय भाई बहिन को रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया गया ।इसके लिए मान्यता है कि जब माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई जब उनके जो गुरु थे उन्हें ऋषि कहा जाता था और उनके व्दारा विशेष रूप से इस दिन रक्षा सूत्र बांधा जाता था, इसी कारण इस दिन को "ऋषि पंचमी" कहा जाता है । रंग बिरंगे धागे, कुसुम मौली के स्थान पर राखियों का रूप ले लिया है ।विदित हो कि माहेश्वरी समाज पीढ़ी दर पीढ़ी इस पारम्परिक ऋषि पंचमी के पावन दिवस पर रक्षाबंधन मनाता आ रहा है ,उल्लेखनीय है कि भारत में ही नहीं विश्व मे माहेश्वरी समाज के लोग इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं ।दुखित घटनाक्रम और भौगोलिक कारणवश कुछेक परिवार इस दिन की अपेक्षा त्योहार को श्रावणी पूर्णिमा के दिन ही मनाते हैं ।