: गो अभयारण्य में मासिक सत्संग 25 जून अमावस्या को
Mon, Jun 23, 2025
गो अभयारण्य में मासिक सत्संग 25 जून अमावस्या को
सुसनेर/23 जून, मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं विश्व के लोक प्रसिद्ध गो सेवा संस्थान श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संस्थापक एवं संरक्षक परम श्रद्धेय गोऋषि पूज्य स्वामी दत्ताशरणानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में संचालित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य सालरिया में हर माह होने वाले मासिक सत्संग के तहत आगामी 25 जून 2025,बुधवार अमावस्या के पुण्य पर्व पर प्रातः 10 बजे से ग्वाल सन्त पूज्य स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती जी महाराज के मुखारविंद से गो महिमा कथा एवं उसके बाद मैनपुर निवासी सरस्वती शिशु मंदिर ननोरा के प्रधानाचार्य रोडू सिंह जी के परिवार की और से गोव्रती महा प्रसादी रहेगी, जिसमें आप अपने ईष्ट मित्रों एवं परिवार के साथ सादर आमंत्रित है ।मासिक सत्संग से पूर्व गो अभयारण्य संचालन मंडल की बैठक का आयोजन भी होगा , संचालन समिति की बैठक में मध्यप्रदेश के गो सेवक मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन जी यादव एवं मध्यप्रदेश के गोपालन मंत्री लखन जी पटेल द्वारा माननीय मुख्यमंत्री आवास पर हुए प्रदेश के गो पालक सम्मेलन में विश्व के प्रथम गो अभयारण्य को आचार्य श्री विद्यासागर जीव दया(गोसेवा) के प्रथम पुरस्कार से सम्मानित करने पर माननीय मुख्यमंत्री जी एवं मध्यप्रदेश शासन का आभार प्रस्ताव सहित गो अभयारण्य के बहु आयामी विकास के लिए प्रस्ताव लेकर उनका क्रियान्वय करने के निर्णय लिए जाएंगे ।
: नेशनल गोलबॉल ट्रेनिंग कैंप 2025 का भव्य शुभारंभ नवचेतन अंधजन मंडल, गुजरात में
Mon, Jun 23, 2025
नेशनल गोलबॉल ट्रेनिंग कैंप 2025 का भव्य शुभारंभ नवचेतन अंधजन मंडल, गुजरात में
गोलबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित नेशनल गोलबॉल ट्रेनिंग कैंप 2025 का भव्य शुभारंभ दिनांक 22 जून 2025 को नवचेतन अंधजन मंडल परिसर, भुज, गुजरात में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण शिविर 21 जून से 28 जून 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह की शुरुआत नवचेतन अंधजन मंडल के बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस शुभ अवसर पर गोलबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव श्री स्वराज सिंह जी, श्री कमलकांत जी (टीम लीडर, GFI), नवचेतन अंधजन मंडल के सचिव श्री हिमांशु सोंपुरा जी, GFI की टेक्निकल टीम, तथा IBSA के सदस्य श्री कैजिटिन फोनेरायो सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस प्रशिक्षण शिविर में कुल 32 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं, जिनमें 18 बालक एवं 14 बालिकाएं शामिल हैं। खिलाड़ियों को आगामी अंतर्राष्ट्रीय गोलबॉल चैंपियनशिप तथा पैरा एशियन गेम्स 2025 की चयन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। श्री कमलकांत जी ने बताया कि चयनित 6 पुरुष और 6 महिला खिलाड़ी मिस्र (Egypt) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस प्रशिक्षण कैंप में देश के लगभग 10 राज्यों – महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु एवं बिहार – के खिलाड़ियों ने सक्रिय भागीदारी की। गोलबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के कुल 9 अधिकारी एवं IBSA के 3 सदस्य इस आयोजन में उपस्थित रहे, जिनकी देखरेख में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। श्री हिमांशु सोंपुरा जी ने सभी खिलाड़ियों को आश्वस्त किया कि नवचेतन संस्था द्वारा उन्हें आवास, भोजन, परिवहन एवं सभी आवश्यक सुविधाएं इस कैंप के दौरान दी जा रही हैं, जिससे खिलाड़ी पूरी एकाग्रता एवं समर्पण के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। मध्य प्रदेश गोलवाल टीम से दो पुरुष दो महिला एवं एक कोच नेशनल के में पार्टिसिपेट कर रहे हैं यह जानकारी गोलवाल फेडरेशन आफ मध्य प्रदेश के जॉइंट सेक्रेटरी कमलेश रजक ने दीयह शिविर भारत की गोलबॉल टीम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पहल है।
: गिजूभाई बधेका: बच्चों के गांधी
Mon, Jun 23, 2025
गिजूभाई बधेका: बच्चों के गांधी
(आलेख - सुशील शर्मा)
भारतीय शिक्षा के इतिहास में गिजूभाई बधेका का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्हें "बच्चों का गांधी" कहा जाता है, और यह उपाधि उन्होंने बाल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अपने क्रांतिकारी और दूरदर्शी कार्यों से अर्जित की। उनका मानना था कि बच्चों को भय और दंड से मुक्त एक आनंदमय वातावरण में सीखना चाहिए, जो उस समय की प्रचलित कठोर शिक्षण पद्धतियों के बिल्कुल विपरीत था। गिजूभाई ने 20वीं सदी की शुरुआत में प्रचलित रटंत विद्या और अनुशासन-केंद्रित शिक्षा का पुरजोर विरोध किया। वे समझते थे कि यह प्रणाली बच्चों के स्वाभाविक विकास और रचनात्मकता को कुचल देती है। उनका मानना था कि हर बच्चा अद्वितीय है और उसे अपनी गति से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। गिजूभाई ने मोंटेसरी शिक्षा पद्धति को भारत में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने की अवधारणा को बढ़ावा दिया। उनके विद्यालय, जिसे उन्होंने "बाल मंदिर" कहा, एक ऐसी जगह थी जहाँ बच्चे खुशी से आते थे, खेलते थे और प्रयोग करते हुए ज्ञान प्राप्त करते थे। उन्होंने शिक्षण को नीरस व्याख्यान से हटाकर रोचक गतिविधियों, कहानियों और खेल में बदल दिया। गिजूभाई केवल बच्चों की शिक्षा के बारे में ही नहीं सोचते थे, बल्कि उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी नई दिशा दी। उनका मानना था कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि बच्चों के मित्र, मार्गदर्शक और सहयोगी होने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों के मनोविज्ञान को समझने और उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के अनुसार शिक्षण विधियों को अनुकूलित करने के लिए प्रोत्साहित किया।मातृभाषा में शिक्षा के समर्थक: उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा मिलनी चाहिए, क्योंकि यह सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाती है। उनका मानना था कि अपनी भाषा में सीखने से बच्चे अपनी संस्कृति और जड़ों से भी जुड़े रहते हैं। गिजूभाई ने बाल साहित्य और शिक्षाशास्त्र पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जिनमें "दिवास्वप्न" (दिन के सपने) और "बालदेवो भव" (बच्चे भगवान का रूप हैं) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी कृतियाँ आज भी शिक्षकों और माता-पिता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।गिजूभाई बधेका ने भारतीय शिक्षा को एक नई दिशा दी। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के केंद्र में रखा और दिखाया कि कैसे सीखने को एक आनंदमय और रचनात्मक अनुभव बनाया जा सकता है। उनका दर्शन आज भी प्रासंगिक है और आधुनिक शिक्षा प्रणालियों में समावेशी और बाल-केंद्रित दृष्टिकोणों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। वे वास्तव में भारतीय शिक्षा के एक सच्चे पथ प्रदर्शक थे।आज उनकी पुण्यतिथि है विनम्र श्रद्धा सुमन अर्पित हैं। ✒️सुशील शर्मा✒️