: आत्मा से कटे वाई-फाई से जुड़े
Fri, Jun 27, 2025
आत्मा से कटे वाई-फाई से जुड़े
(सुशील शर्मा) हम अब एक-दूसरेके पास नहीं रहे,हाथ से हाथ छूटे नहीं,पर छूने की इच्छा मर चुकी है। बगल में बैठा इंसानअब बस एक स्थिति हैन ज़िंदा, न मरा,बस उपस्थित। हमने आंखों मेंदेखना छोड़ दिया है,क्योंकि वहां अब सवालनहीं जलते,बल्किउत्तर माँगते चेहरे बैठे हैंथके, झुके, संशय में डूबे। हम बात करते हैं,पर बातें नहीं होतीं,जैसे शब्दों ने आत्मा छोड़ दी हो।हम मुस्कराते हैं,पर वो मुस्कराहटकिसी खोखली दीवार परटंगे पुराने कैलेंडर सी लगती हैजिसे कोई देखता नहीं अब। जब कोई टूटता है अब,तो आवाज़ नहीं आती,क्योंकि हम इतने ‘मग्न’ हैंअपनी टूटी हुई स्क्रीन में,कि असली दरारेंदेख ही नहीं पाते। हम संवेदनशील हैंपर दुनिया के लिए,कभी-कभी।अपने पड़ोस के लिएहम निर्लिप्त हैं,अपनों के आँसुओं के लिएहम व्यस्त हैं। कोई अपना दुख कहता है,तो हम उसेमानसिक बीमार कहते हैं।किसी की पीड़ाअब समाचार बनती है,सम्बंध नहीं। क्या तुमने महसूस किया हैकभी-कभी लोगमुस्कराते हुए भीसिसक रहे होते हैं?और हम,इतने अभ्यस्त हो चुके हैंशोर केकि वो सिसकी अबहमारे कानों तक नहीं आती। हम,जो एक समय मेंआश्रय थे एक-दूसरे के लिए,अबअजनबी कमरों मेंवाई फाई के ज़रिए जुड़ेपर आत्मा से अलग लोग हैं। हमें रिश्ते नहीं चाहिए,हमें नेटवर्क चाहिए।हमें सत्य नहीं चाहिए,हमें सुविधा चाहिए।हमें संवाद नहीं चाहिए,हमें स्टेटस अपडेट चाहिए। कभी-कभी सोचता हूँक्या इंसान अभी भी इंसान है?या वो धीरे-धीरेएक प्रतिक्रिया बन चुका है,जिसे कोई लाइक कर देतो अच्छा लगता है,वरनावो ख़ुद को हीअनदेखा करता है।✒️सुशील शर्मा✒️
: गाडरवारा,नवागत संयुक्त संचालक का किया स्वागत
Fri, Jun 27, 2025
नवागत संयुक्त संचालक का किया स्वागत
गाडरवारा। गत दिवस नवागत संयुक्त संचालक लोक शिक्षण जबलपुर संभाग अरुण इंगले का अल्प प्रवास पर गाडरवारा आगमन हुआ। उनके आगमन पर शिक्षकों ने स्थानीय पलोटन गंज में उनका स्वागत करते हुए मुलाक़ात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नए सत्र को हम सभी चुनौती के रूप में लेकर कार्य करें एवं पिछले सत्र से बेहतर कार्य करें। इस मौक़े पर सेवानिवृत डीईओ अनिल ब्योहार एवं सेवानिवृत प्राचार्य अनूप शर्मा, प्राचार्य प्रतुल इंदुरख्या, एस के मिश्रा, जयमोहन शर्मा, भूपेश ठाकुर, देवेंद्र ठाकुर, महेश अधरुज,नगेन्द्र त्रिपाठी, मधुसूदन पटैल, धनीराम मेहरा आदि उपस्थित रहे।
: संस्कृत को अनिवार्य बनाने की मांग: मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
Fri, Jun 27, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
संस्कृत को अनिवार्य बनाने की मांग: मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सिहोरा: संस्कृत भारती, जबलपुर तथा जिला संस्कृत प्रकोष्ठ प्रभारी और संस्कृत शिक्षकों ने आज जबलपुर कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में लागू करने की मांग की गई। 'जयतु संस्कृतम्' और 'जयतु भारतम्' के उद्घोष के साथ सौंपे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा सूत्र और बहुभाषिकता पर जोर दिया गया है, और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कृत भाषा अत्यंत आवश्यक है।प्रतिनिधिमंडल ने चिंता व्यक्त की कि विद्यालयी शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा को त्रिभाषा के विकल्प के रूप में लागू किया जा रहा है, जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से त्रिभाषा नीति के लिए हानिकारक है। उनका तर्क है कि संस्कृत भाषा के स्थान पर व्यावसायिक शिक्षा को महत्व देना उचित नहीं है, खासकर जब संस्कृत को भारत की आत्मा माना जाता है। उन्होंने इसे नवीन शिक्षा नीति 2020 के नियमों का उल्लंघन बताया।ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि इस स्थिति में सुधार के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य किया जाए और व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में स्थान दिया जाए, ताकि संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन हो सके। शिक्षकों ने हरियाणा बोर्ड और दिल्ली बोर्ड का उदाहरण भी दिया, जहां संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया गया है, और इसी प्रकार मध्य प्रदेश में भी विद्यालयी शिक्षा विभाग में संस्कृत को अनिवार्य भाषा के रूप में स्थान देने की मांग की।संस्कृत शिक्षकों ने जोर देकर कहा कि संस्कृत भाषा को वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य भाषा के रूप में स्थान मिलना चाहिए, और उन्होंने कक्षा 1 से कक्षा 12वीं तक संस्कृत को अनिवार्य किए जाने की अपनी बात रखी। इस अवसर पर डॉ. राधिका प्रसाद मिश्रा, अवधनारायण मिश्रा, सत्यनारायण द्विवेदी, चंद्रावली सोनी, सीमा भसीन, शैलेन्द्र पंडा, सत्येन्द्र कुमार दीक्षित, ओम प्रकाश तिवारी, धीरेन्द्र पाण्डेय, कन्हैया कुमार आर्य, चंचल धाणक, दीपक विनायक, आरती झरिया, रिक्खीराम झरिया, विनोद कोरटकर, अर्पित जैन आदि उपस्थित थे।