: बैंक अर्थ-व्यवस्था की जीवन रेखा - मुख्यमंत्री श्री चौहान
Mon, Feb 6, 2023
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एचडीएफसी बैंक की 20 शाखाओं का किया शुभारंभ
श्यामला हिल्स में आरंभ की एचडीएफसी बैंक शाखा
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बैंक अर्थ-व्यवस्था की जीवन रेखा हैं। बैंक के बिना वर्तमान में जीवन की कल्पना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रत्येक व्यक्ति का खाता खुलवाने के लिए अभियान आरंभ किया, जिसके परिणामस्वरूप सभी गरीब व्यक्तियों के बैंक में खाते खोले गए। केन्द्र और राज्य सरकारों की जन-कल्याणकारी योजनाओं की राशि पात्र व्यक्तियों के खाते में सीधे डाली जाती है। बैंकों के विस्तार और उनके द्वारा जन-सामान्य को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है और लोगों का जीवन आसान हुआ है। एचडीएफसी बैंक द्वारा प्रदेश में स्व-रोजगार की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने में दिया जा रहा सहयोग सराहनीय है। मुख्यमंत्री श्री चौहान मध्यप्रदेश में एचडीएफसी बैंक की 20 शाखाओं के वर्चुअल शुभारंभ के लिए श्यामला हिल्स स्थित मानस भवन में लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मानस भवन में एचडीएफसी के एटीएम का फीता काट कर और प्रदेश की 20 शाखाओं का वर्चुअली शुभारंभ किया। कार्यक्रम से एचडीएफसी का मुम्बई स्थित हेड ऑफिस तथा प्रदेश की 20 शाखाएँ वर्चुअली जुड़ी। पूर्व राज्यसभा सदस्य श्री रघुनंदन शर्मा, एचडीएफसी बैंक के सर्किल हेड श्री आशु गर्ग, एम.पी. स्टेट हेड श्री नीरज नेमा तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मानस भवन में स्थित महाकवि तुलसीदास की प्रतिमा पर मार्ल्यापण किया।
जनजातीय बहुल और दूरदराज के जिलों में साख जमा अनुपात में सुधार आवश्यक
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 17 लाख 33 हजार करोड़ की जमा राशि, 15 लाख 6 हजार करोड़ के अग्रिम ऋण और 22 लाख 95 हजार करोड़ की बैलेंस शीट के साथ एचडीएफसी भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। बैंक का साख जमा अनुपात (सी.डी. रेशियो) 118 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि बैंक द्वारा राज्य के विभिन्न सेक्टर्स को दिया जा रहा ऋण प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बैंक जनजातीय बहुल और दूरदराज के जिलों में साख जमा अनुपात को बेहतर करने के लिए विशेष रूप से प्रयास करें। महिला स्व-सहायता समूह प्रदेश में बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में उभरे हैं। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक महिला की आय प्रतिमाह 10 हजार रूपए हो, यह सुनिश्चित करने के लिए बैंकों से स्व-सहायता समूहों को निरंतर प्रोत्साहन देने में सहयोग अपेक्षित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आरंभ की जा रही लाड़ली बहना योजना में प्रत्येक पात्र महिला को एक हजार रूपए प्रतिमाह अर्थात 12 हजार रूपए प्रतिवर्ष उपलब्ध कराये जाएंगे। इस राशि से गाँव और कस्बे स्तर पर छोटी व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। प्रदेश के आर्थिक सूचकांक निरंतर बेहतर हो रहे हैं।
भोपाल में एक, जबलपुर में दो, इंदौर में चार शाखाओं सहित कुल 20 शाखाएँ आरंभ
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में एचडीएफसी बैंक की शाखाओं का वर्चुअल शुभारंभ किया। इनमें भोपाल की श्यामला हिल्स शाखा, जबलपुर की स्नेह नगर तथा सदर शाखा, इंदौर की मनोरमा गंज, भानपुरा, भौरासला और बसंत विहार शाखा, उज्जैन की तराना शाखा सम्मिलित हैं। साथ ही सीहोर की बुधनी, राजगढ़ की खिलचीपुर और कुरावर, निवाड़ी की ओरछा, खण्डवा की मूंदी, खरगोन की महेश्वर, दमोह की पलांदी चौराहा, अनूपपुर की बिजौरी, मण्डला की नैनपुर, रीवा की गोलपार्क, सतना की पन्ना रोड तथा आगर-मालवा की नरखेड़ा शाखा का भी शुभारंभ किया गया। मुम्बई से एचडीएफसी बैंक के कंट्री हेड श्री अरविंद बोरा ने वर्चुअली संबोधित किया। सर्किल हेड श्री आशु गर्ग तथा एम.पी. स्टेट हेड श्री नीरज नेमा ने प्रदेश में बैंक की गतिविधियों, बैंक शाखाओं और एटीएम सुविधा संबंधी जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान का शाल-श्रीफल से स्वागत किया गया। उद्घाटित शाखाओं के अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री श्री चौहान से वर्चुअली संवाद भी किया।
: प्रदेश में अब तक 45.61 लाख मीट्रिक टन धान हुआ उपार्जित : खाद्य मंत्री श्री सिंह
Sat, Jan 14, 2023
16 जनवरी तक होगा उपार्जन
प्रदेश में अब तक 45.61 लाख मीट्रिक टन धान हुआ उपार्जित : खाद्य मंत्री श्री सिंह,16 जनवरी तक होगा उपार्जनखाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री बिसाहूलाल ने कहा है कि प्रदेश में अब तक 45 लाख 61 हजार मीट्रिक टन धान का उपार्जन हो चुका है। श्री सिंह शुक्रवार को मंत्रालय में धान उपार्जन की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में धान का उत्पादन नहीं है वहाँ चावल भेजने के बदले धान भेजी जाएगी। इससे जहाँ एक ओर परिवहन एवं समय की बचत होगी वहीं दूसरी ओर संबंधित जिले में धान मिलर्स को भी काम मिल सकेगा। श्री सिंह ने बताया कि 28 नवम्बर से शुरू धान का उपार्जन 16 जनवरी तक चलेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष सर्वाधिक धान उपार्जन वाला जिला बालाघाट रहा जहाँ 5 लाख् 38 हजार 554 मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ। प्रदेश में अभी 41 लाख 78 हजार 579 मीट्रिक टन धान का उर्पाजन शेष है। उन्होंने बताया कि इस साल सितम्बर तक 45.61 लाख मीट्रिक टन मिलिंग का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। केन्द्र सरकार ने धान मिलिंग की दर 10 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित की है। राज्य शासन द्वारा धान मिलर्स को प्रोत्साहित करने के लिए मिलर्स को 50 रूपये प्रति क्विंटल की दर से अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। श्री सिंह ने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश में धान मिलर्स को प्रोत्साहित करने के उददेश्य से नई धान मिल लगाने के लिए राज्य सरकार सब्सिडी प्रदान करती है। धान परिवहन 185 कि.मी. तक मिलर्स को नि:शुल्क प्रमुख सचिव खाद्य श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि मिलर्स को अपनी धान मिल से 185 कि.मी. तक के परिवहन व्यय की प्रतिपूर्ति निश्चित दर पर राज्य शासन करेगा। इससे अधिक दूरी के लिए परिवहन व्यय भार मिलर को स्वयं भुगतान करना होगा। राज्य शासन द्वारा ऐसे जिलों में जहाँ धान का उपार्जन नहीं है वहाँ आवश्यकता से अधिक उत्पादन वाले जिलों से धान भेजा जायेगा। श्री उमराव ने बताया कि राज्य शासन धान मिलिंग क्षमता एवं ब्लेंडिंग क्षमता में वृद्धि के लिए सतत प्रयासरत है। प्रदेश में 729 राईस मिल हैं जिनमें से 464 मिलों में ब्लेंडिंग यूनिट स्थापित है। शेष मिलों में ब्लेंडिंग यूनिट लगाए जाने की कार्यवाही चलन में है। फोर्टीफाइड राईस के निर्माण में एफआरके की व्यवस्था के लिए मिलर्स को तीन माह की अनुमति दी गई है। नवीन मिल स्थापना के लिए 8 जिलों में 5 लाख 75 हजार मी.ट. वार्षिक क्षमता वाली कुल 16 राईस मिल का प्रावधान है।
: 7वीं जीआईएस में मध्यप्रदेश की क्षमताओं से रू-ब-रू होंगे निवेशक
Tue, Jan 10, 2023
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी समिट को वर्चुअली करेंगे संबोधित
इंदौर में 11-12 जनवरी को हो रही है ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट
भारत का दिल मध्यप्रदेश, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से संभावित निवेशकों के लिए राज्य की क्षमताओं का विकास, निवेश के माहौल और बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देने तथा अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए विकास का एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 11-12 जनवरी को देश के सबसे स्वच्छ शहर एवं वाणिज्यिक राजधानी इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में होने जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सातवीं समिट का वर्चुअली शुभारंभ कर संबोधित भी करेंगे। उद्घाटन सत्र में सूरीनाम के राष्ट्रपति श्री चंद्रिका प्रसाद संतोखी एवं गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली भी शामिल होंगे और उनका संबोधन भी होगा। उद्घाटन सत्र को केन्द्रीय विदेश मंत्री श्री एस. जयशंकर भी संबोधित करेंगे। सत्र में केन्द्रीय वाणिज्यिक एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल का वर्चुअल संबोधन होगा। समिट को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी संबोधित करेंगे। समिट का उद्घाटन सुबह 10:30 बजे ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर में होगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को सफल बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री ने राज्य में निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए दिल्ली, मुंबई, पुणे और बैंगलुरू में रोड-शो किए। उद्योगपतियों से नियमित रूप से वन-टू-वन चर्चा एवं प्रति सप्ताह उद्योगपतियों से भेंट भी की। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न देशों के संभावित निवेशकों के साथ भी बातचीत की। मुख्यमंत्री श्री चौहान के इन्हीं प्रयासों से समिट प्रदेश के लिए गेम-चेंजर और मील का पत्थर साबित होगी। "मध्यप्रदेश-भविष्य के लिए तैयार राज्य" थीम पर होने जा रही इस समिट में पर्यावरण-संरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। यह पूरी तरह "कार्बन न्यूट्रल" और "जीरो वेस्ट" पर आधारित होगी। इन्वेस्टर समिट में देश और विदेश के निवेशकों को राज्य में लाने के लिए मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिये अनुकूल वातावरण की तमाम परिस्थितियों का प्रदर्शन किया जायेगा। समिट का उद्देश्य राज्य की नीतियों को बढ़ावा देना, उद्योग अनुकूल नीतियाँ बनाने के लिए औद्योगिक संगठनों के साथ परामर्श कर प्रदेश में निवेशक फ्रेंडली वातावरण बनाना, सहयोग के अवसर और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देना है। वर्ष 2007 से ही मध्यप्रदेश की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट दुनिया भर के निवेशकों और व्यापार समुदाय के लिए बहुत बड़ा सुअवसर बना है। इस बार भी जीआईएस एक ऐसा मंच होगा, जहाँ वैश्विक नेता, उद्योगपति और विशेषज्ञ उभरते बाजारों पर अपने विचार साझा करने, निवेश क्षमता का दोहन करने और फ्यूचर रेडी, मध्यप्रदेश की सफलता की कहानी का हिस्सा बनने के लिए एक साथ आएंगे। देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपति करेंगे शिरकत इंदौर में होने रही इस ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 65 से अधिक देशों के प्रतिनिधि-मंडल भाग लेंगे। इसमें 20 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, वाणिज्य दूतावास और राजनयिक भाग लेंगे। जीआइएस के अंतर्राष्ट्रीय मंडप में 9 भागीदार देश और 14 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन अपने देशों के विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन करेंगे। समिट से राज्य के निर्यातकों को संभावित विदेशी खरीददार से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। जिन प्रमुख उद्योगपतियों ने ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में शामिल होने की सहमति दी है, उनमें सर्वश्री कुमार मंगलम बिड़ला, नोएल टाटा, नादिर गोदरेज, पुनीत डालमिया और अजय पीरामल सहित भारत के 500 से अधिक प्रमुख उद्योगपति शामिल हैं। कार्यक्रम में फार्मा, आईटी, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, वस्त्र, रसायन, सीमेंट, खाद्य प्र-संस्करण, रसद, पेट्रोकेमिकल, पर्यटन, नवकरणीय ऊर्जा, सेवाओं आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों की भागीदारी होगी। क्रेता-विक्रेता बैठक और विक्रेता विकास कार्यक्रम समिट के दौरान राज्य के एमएसएमई को वैश्विक बाजार तक पहुँचाने और राज्य से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए क्रेता-विक्रेता मीट का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से यूएसए, कनाडा, इंग्लैंड, जापान, इजराइल, नीदरलैंड, सिंगापुर, थाईलैंड, कंबोडिया, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों के खरीदार शामिल हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों जैसे फार्मास्युटिकल, टेक्सटाईल, इंजीनियरिंग, कृषि और आईटी सेवाओं के 1500 से अधिक निर्यातक सहभागिता करेंगे। समिट में आकर्षण का केन्द्र होगी प्रदर्शनी प्रदर्शनी में एक समर्पित मध्यप्रदेश पवेलियन होगा, जो औद्योगिक बुनियादी ढाँचे, मौजूदा और आगामी औद्योगिक पार्कों, प्रमुख निवेश परियोजनाओं को प्रदर्शित करेगा। राज्य के विभिन्न पहलुओं जैसे विरासत, संस्कृति, वन्य-जीवन आदि को भी कवर करेगा। प्रमुख कंपनियाँ फार्मा, आईटी, ऑटोमोबाइल्स, टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स, केमिकल्स, सीमेंट, फूड प्रोसेसिंग आदि विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी। औद्योगिक प्रदर्शनी: एक लाख वर्ग फुट में फैले विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदर्शित करने के लिए 100 से अधिक उद्योगों द्वारा स्टॉल लगाए जाएंगे और प्रतिभागियों को सूचित करने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) रोबोट भी होंगे। राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने के लिए एक "सांस्कृतिक क्षेत्र" भी बनाया जाएगा, जिसमें स्थानीय एवं जनजातीय कला जैसे गोंड पेंटिंग, भील पेंटिंग, जरी-जरदोजी, जूट, बाग प्रिंट, बाटिक प्रिंट, गुड़िया, बाँस कला, घंटी कारीगरों द्वारा धातु शिल्प और हथकरघा जैसे चंदेरी और महेश्वरी वस्त्रों आदि का प्रदर्शन किया जाएगा।