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प्रख्यात साहित्यकार सुशील शर्मा उपलब्धियों का बना रहे इतिहास : साहित्य के 'मातृभाषा रत्न' बने सुशील शर्मा: नेपाल से मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

Aditi News Team

Sun, Feb 22, 2026

साहित्य के 'मातृभाषा रत्न' बने सुशील शर्मा: नेपाल से मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

गाडरवारा। प्रख्यात साहित्यकार सुशील शर्मा की उपलब्धियों के आकाश में एक और चमकीला सितारा जुड़ गया है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के पावन अवसर पर नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में उन्हें "मातृभाषा रत्न" मानद उपाधि से विभूषित किया गया है। यह सम्मान शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा उनकी मातृभाषा के प्रति अनवरत सेवा और साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

सुशील शर्मा केवल एक नाम नहीं, बल्कि निरंतर सृजन का एक जीवंत पर्याय हैं। उनकी लेखनी ने अब तक 32 पुस्तकों के माध्यम से समाज को नई दिशा और वैचारिक ऊर्जा प्रदान की है। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें पूर्व में राज्यपाल पुरस्कार और राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान जैसे प्रतिष्ठित अलंकरणों से नवाजा जा चुका है।

साहित्यिक जगत में उनकी सक्रियता का प्रमाण उनके खाते में दर्ज करीब 150 छोटे-बड़े साहित्यिक पुरस्कार हैं, जो देश के कोने-कोने से उन्हें प्राप्त हुए हैं।

21 फ़रवरी 2026 को काठमांडू (नेपाल) में आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में फाउंडेशन के अध्यक्ष आनंद गिरि मायालु और चयन समिति प्रमुख मंजू खरे द्वारा उन्हें ऑनलाइन यह डिजिटल प्रशस्ति पत्र और मानद उपाधि प्रदान की गई। प्रशस्ति पत्र में उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उनके द्वारा किए गए 'मातृभाषा सेवा' के कार्यों को रेखांकित किया गया है।

एक सफल शिक्षाविद और साहित्यकार का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना संपूर्ण मध्य प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। इस उपलब्धि पर क्षेत्र के साहित्यकारों, मित्रों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि शर्मा जी की यह उपलब्धि उनकी चार दशकों की तपस्या का प्रतिफल है।

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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)

डॉ सुशील शर्मा

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