सिद्धक्षेत्र,जैन तीर्थ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के : लेखक संस्कृति की रक्षा सदियों सदियों तक करता है -पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज
Aditi News Team
Sun, Mar 15, 2026
रिपोर्टर जय कुमार जैन
लेखक संस्कृति की रक्षा सदियों सदियों तक करता है -पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र, जैन तीर्थ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से अभिसिंचित कुण्डलपुर क्षेत्र में गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के शिष्य चर्या शिरोमणि ,पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का ससंघ मंगल आगमन हुआ। समस्त आचार्य संघ पूज्य बड़े बाबा के दरबार में पहुंचा जहां अभिषेक ,शांतिधारा का आयोजन हुआ। दोपहर में आचार्य संघ की आहारचर्या संपन्न हुई ।समायिक उपरांत स्थानीय संत निवास में आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने समयसार पर सार गर्भित मंगल प्रवचन देते हुए कहा आचार्य प्रवर भगवत कुंदकुंद स्वामी भारत की भूमि पर ऐसे महान जैन दिगम्बर जैन आचार्य हुए जिन्होंने तत्वज्ञान पर विशेष चिंतन किया। आचार्य कुंदकुंद स्वामी ने ही नहीं अपितु उन सभी आचार्यों ने हम सभी के लिए भिखारी नहीं बनने दिया। जिनसेन स्वामी आदि ने पुराण ग्रंथ लिखे ,नेमीचंद सिद्धांत चक्रवर्ती ,आचार्य भगवन पुष्पदंत भूत वली स्वामी आचार्य भगवन ने करुणा नियोग पर ग्रंथ लिखे। जब-जब अगम की व्याख्या होगी श्रमण परंपरा में दिगम्बर हो, श्वेतांबर हो जब तक आचार्य पुष्पदंत भूत वली के षठखंडागम का अध्ययन नहीं होता तब तक किसी को सिद्धांत का बोध नहीं होता। भारत की भूमि जब-जब इतिहास खोलेगी प्राकृत में अपभ्रंश में अर्धमागधी इन पर जो साहित्य है जैन आचार्यों का है। सर्वाधिक छंद अलंकार व्याकरण सभी जैन आचार्य ने लिखे ।ऐसी कोई विद्या नहीं है जिस पर जैन आचार्य ने अपनी लेखनी न चलाई हो ।यहां सारा देश मुस्कुराता है हिंदी के नाम पर हिंदी का जनक भी यदि कोई है तो जैन दर्शन है क्यों? अपभ्रंश के लिए जैनाचार्यों ने स्थान दिया और अपभ्रंश से ही हिंदी का उद्गम होता है ।परमात्म प्रकाश जैसा ग्रंथ योगसार यह दो ग्रंथ आचार्य भगवन योगेंद्रदेव स्वामी ने लिखे ।आचार्य जिनसेन स्वामी ने पुराणशास्त्र लिखा। आपको आश्चर्य होगा 8 दिन के अंदर पारस अभ्युदय जैसा ग्रंथ लिखा जो की अलंकार का महान ग्रंथ है ।यदि सम्राट संस्कृति की रक्षा करता है देश की रक्षा करता हो अपनी आयु के काल तक ही कर पाता है ।पर लेखक संस्कृति की रक्षा सदियों सदियों तक करता है ।इसलिए प्रत्येक श्रावक का कर्तव्य है अपने बालक बालिकाओं को गंभीर अध्ययन करायें। ललित कला के साथ साहित्य कला सिखाएं ।कविता हजारों साल चलेगी कविता के माध्यम से संपूर्ण संस्कृति की रक्षा होगी । आचार्यों ने एक से बढ़कर एक ग्रंथ लिखे हैं ।जिसे दर्शनशास्त्र का ज्ञान नहीं वह व्यक्ति अपने सम्यक की भी रक्षा नहीं कर सकता। प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य श्री ने मंदिरों तीर्थक्षेत्रों पर जो परंपरा होती थी शास्त्र वाचना की वह परंपरा निरंतर चलनी चाहिए ऐसी प्रेरणा देते हुए कहा कि पहले प्रतिदिन संध्या समय शास्त्र वाचना होती थी। जिनवाणी सिर पर रखकर लाते थे ।लाल पट्टी बिछी रहती थी। सावधान करके अध्ययन किया जाता था ।वही परंपरा अभी चलनी चाहिए। कुण्डलपुर भगवान आदिनाथ स्वामी का स्थान है ।सुंदर-सुंदर भवन है यात्री प्रतिदिन आते हैं यहां प्रतिदिन प्रवचन होते रहना चाहिए ।कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों को संकेत दिया की यहां भी शास्त्र वाचना प्रवचन होना चाहिए । जिस तरहअभिषेक की घोषणा होती है इसी तरह भले ही 5 मिनट उपदेश करो ।आगम ग्रंथ अपने पास है। मंदिर समोशरण होता है जब तक समोशरण में दिव्य ध्वनि न खिरे तो समोसरण काहे का। बड़े बाबा मंदिर के पुजारी आदित्य और अनिल पुजारी को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि तुम यह मत सोचना कि मैं पुजारी हूं तुम यह सोचना मैं जगतपति भी हूं। जिसके पास श्री जी है वह श्रीपति क्यों नहीं हो सकता। इस अवसर पर दिगम्बर आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज द्वारा रचित "विचार" ग्रंथ जिसका संपादन श्रमण मुनि श्री साम्यसागर जी महाराज द्वारा किया गया कुंण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ सहित पदाधिकारी सदस्यों ने विमोचन किया।आचार्य श्री ने कहा कि वे भव्य जीव जो घर छोड़कर जंगल जंगल ,क्षेत्रों पर आकर चौका लगाते हैं उन्हें भी धन्यवाद आशीर्वाद मिलना चाहिए। आचार्य श्री संघ का विहार गढ़ाकोटा की ओर हो गया।
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कुंडलपुर
अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)