Saturday 31st of October 2026

ब्रेकिंग

नरसिंहपुर में घटना को लेकर मेहरा समाज महासभा मध्यप्रदेश ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही एवं निष्पक्ष जांच की मांग की

पुरानी रंजिश के चलते हत्या किए जाने का मामला आया सामने,48 घंटे के अंदर आरोपी गिरफ्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों का हंगामा,

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के साथ ही जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट वर्तमान दौर की प्रमुख आवश्यकता है।

₹600 प्रति क्विंटल से कम दाम पर मिल की होगी तालाबंदी

: गरीबों को रोजगार देने वाली मनरेगा इस तरह बन रही कमाई का जरिया

Aditi News Team

Mon, Mar 17, 2025
रिपोर्टर सचिन जोशी  गरीबों को रोजगार देने वाली मनरेगा इस तरह बन रही कमाई का जरिया गाडरवारा भारत में मजदूरों को सीधे तौर पर आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए भारत सरकार ने 7 सितंबर 2005 से महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना MGNREGA की शुरुआत की थी। योजना का मकसद था किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना, यानी कि सरकार वैसे किसी भी अकुशल मजदूर को प्रत्येक वित्तीय साल में 220 रुपये की दिहाड़ी पर 100 दिनों तक का रोजगार देगी जो काम करने को इच्छुक हों। लेकिन, ये योजना ज़मीन पर कितनी कारगर है, इसे समझने के लिए हमने पिछले दिवस चीचली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत पिपरिया ढुरसरा में इसका गहन जायजा लिया । खेत तालाब योजना से खुद रहे तालाब में लगे ट्रैक्टर खा रहे मजदूरों का हक आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भारत सरकार की चल रही मनरेगा योजना से एक विशेष आस रहती है जबकि सरकार भी तरह-तरह के आयाम से मजदूर हित को लाभ पहुंचे इसलिए निरंतर योजना का क्रियान्वयन कर रही है लेकिन पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधियों द्वारा उनके हक से मिलने वाली मजदूरी को डकार ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे इस योजना से जुड़कर रोजगार पाने के लिए मजदूर का एक कार्ड बनता है, जिसे जॉब कार्ड कहा जाता है। इसी कार्ड में मजदूर की दैनिक हाजिरी सहित मजदूर को कितने दिन का रोजगार मिला है जैसी तमाम जानकारियों का लेखा-जोखा होता है जिसे समय-समय पर उच्च अधिकारियों को दिखाया जाता है और इसी दिखावे में जमीनी स्तर के कार्य कागजों में बनकर तैयार हो जाते हैं और मजदूरों को भी रोजगार मिल जाता है प्रदेश सरकार की तनख्वाह से नहीं भर रहा पेट कमीशन पर करते हैं हस्ताक्षर ग्राम पंचायत स्तर पर अक्सर देखे जाने वाले कार्यों में लगभग भ्रष्टाचार चरम पर है ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश सरकार की तनखा से लगे ग्राम पंचायत सचिव रोजगार सहायक से यदि इस संबंध में बात करते हैं तो उनके द्वारा कहा जाता है कि पूरे भारत भर में मनरेगा योजना जहां भी चल रही है एक भी मजदूर काम नहीं करता है इसलिए मशीनों से काम करा कर लोगों के खाते में पैसे डालकर उनसे वापस लिए जाते हैं यह फॉर्मेलिटी प्रगतिरत कार्य के पैसे को निकालने के लिए कमीशन बेस पर की जाती है जिससे यह प्रतीत होता है कि कमीशन वेश मतलब हर वह जिम्मेदार अधिकारी जो उपरोक्त कार्य योजनाओं से जुड़ा रहता है मनरेगा में घोटालेबाजी की जड़ें मजबूत मनरेगा में घोटालेबाजी की जड़ें इतनी मजबूत हो गई हैं कि किसी भी ग्रामीण में इतनी हिम्मत नहीं कि वह इसका विरोध कर सके। मनरेगा लोगों को रोजगार से जोड़ने की योजना है, चूँकि लोगों के लिए रोजगार तैयार करना है, इसीलिए पंचायत में तरह तरह के कार्य किये जाते हैं। लेकिन लोगों ने रोजगार मुहैया कराने वाली योजना को अपने तरीके पर ढाल लिया है। स्थल पर योजना का प्राथमिक मकसद रोजगार देने के बजाय काम करना बन गया है। इन कार्यों में हो रहा घपला पौधारोपण तालाब किनारे , संतोष,श्रीकांत,राजाराम, आदि खेत तालाब, पिपरिया हुक्कम चंद,दीपक, कन्हैया, शारदा प्रसाद,निकाली गई राशि 454625 रुपए सुदूर सड़क पिपरिया से राम जी के घर की ओर 387163 रुपए   इनका कहना है कि कलावती व्यारे गाडरवारा एसडीएम एवं प्रभारी ब्लॉक सीईओ चीचली  आपके द्वारा जानकारी प्रदान हुई है इसकी तत्काल जांच करवाई जाएगी ।    

Tags :

जरूरी खबरें