: हाई स्कूल निमावर में शिक्षक ने दिया योग-सन्देश
Fri, Jun 21, 2024
हाई स्कूल निमावर में शिक्षक ने दिया योग-सन्देश
गाडरवारा। विश्व योग दिवस के अवसर पर क्षेत्र के साईंखेड़ा ब्लॉक अंतर्गत शास० हाई स्कूल निमावर में योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्राम के नागरिकों आदि ने भाग लिया व योगाभ्यास किया। कार्यक्रम में शाला के प्राचार्य श्री अरुण तिवारी व योग प्रभारी शिक्षक संजय श्रीवास्तव ने योग, ध्यान, व्यायाम और सूर्य नमस्कार आदि का अभ्यास कार्य पूर्ण कराया एवं योग से होने वाले लाभ बताये। विदित हो कि संजय श्रीवास्तव विगत सत्र से ही शाला में प्रति सप्ताह- प्रत्येक बुधवार को शैक्षणिक कार्य के अतिरिक्त, समय देकर योग शिविर का निरंतर आयोजित करते आ रहे हैं।
: माँ बनने में हो रही है परेशानी तो योगासन से मिलेगा लाभ - डॉ चंचल शर्मा
Fri, Jun 21, 2024
माँ बनने में हो रही है परेशानी तो योगासन से मिलेगा लाभ - डॉ चंचल शर्मा
माँ बनने का सुखद अनुभव हर स्त्री के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है लेकिन आजकल की बदलती जीवनशैली के कारण बहुत सारी महिलाएं या तो इस सुख से वंचित रह जाती हैं या इस प्रक्रिया को पूर्ण करने में बहुत जटिल राहों से गुजरने की वजह से हिम्मत हार जाती हैं। चाहे आप भारतीय समाज की बात करें या पश्चात्य बच्चों के मामले में लोगों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। प्रत्येक कपल इस प्रयास में लगा रहता है कि उन्हें बायोलॉजिकली अपनी ही संतान मिले, इसलिए आर्टिफीसियल तरीकों को अपनाने से पहले, या गोद लेने से पहले वो जहाँ तक हो सके यही प्रयास करते हैं की उनकी खुद की संतान हो जाए। कुछ लोगों को शीघ्र ही सफलता भी मिल जाती है परन्तु कुछ लोगों को अस्पताल के चक्कर लगाने और समाज के ताने भी सुनने पड़ते हैं जिससे उनका तनाव दिन -प्रतिदिन बढ़ता जाता है। आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा से बातचीत में उन्होंने इस विषय में बताया कि अक्सर लोगों को आयुर्वेदा की शक्ति और नियमित योगाभ्यास से सफलता मिल जाती है। उनके पास बहुत से ऐसे पेशेंट भी आते हैं जिन्होंने पहले IVF या IUI करवाया और वह फेल हो गया लेकिन आयुर्वेदिक उपचार से उन्हें नैचुरली कन्सीव करने में सफलता मिली है। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी बताया कि योगासन से सीधा आपकी फर्टिलिटी पर असर नहीं होता है बल्कि यह उपचार की सभी प्रक्रिया के साथ पूरक का काम करता है। नियमित योग करने वाले लोगों के कन्सीव करने की सम्भावना उन लोगों की तुलना में अधिक होती है जो शारीरिक रूप से बहुत एक्टिव नहीं है। नियमित योगासन से फर्टिलिटी पर पड़ने वाले प्रभाव नियमित योग करने से आपके हॉर्मोन्स का संतुलन बना रहता है और आप उन बिमारियों से सुरक्षित रहते हैं जो हार्मोनल असंतुलन की वजह से उत्पन्न होता है।योगाभ्यास से आपका मस्तिष्क शांत होता है और शरीर तथा मन के बीच संतुलन बना रहता है।इनफर्टिलिटी की एक बड़ी वजह तनाव भी है लेकिन योग करने से आपका तनाव कम होता है।शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने के लिए तथा पेल्विक मसल्स को मजबूती प्रदान करने के लिए भी आप योगाभ्यास कर सकते हैं। यहाँ ऐसे प्रसिद्ध योगासनों के बारे में जानेंगे जिससे इनफर्टिलिटी से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी बद्धकोणासन: इसे तितली पोज या butterfly pose भी कहते हैं। इस योगासन के नियमित अभ्यास से आपके जाँघों, पेल्विक मसल्स में खिंचाव आता है जिससे रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। यह योगाभ्यास खासतौर पर महिलाओं के लिए बहुत लाभदायक होता है। पश्चिमोत्तानासन: इस योग से आपके पेट की चर्बी भी कम होती है इसलिए इसके नियमित अभ्यास से आप अपना वजन नियंत्रित रख सकते हैं जिससे आप मोटापे के कारण होने वाले इनफर्टिलिटी के जोखिम को कम कर सकते हैं। इस योगासन से आपकी फर्टिलिटी बेहतर होती है। बालासन (child pose): इस योगासन को आप कन्सीव करने से पहले और प्रेगनेंसी के दौरान भी कर सकते हैं। इससे आपके कूल्हों, पीठ और जांघों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और शरीर में ब्लड का फ्लो भी बढ़ता है। सूर्यनमस्कार: जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक क्रैम्प्स होते हैं उनके लिए यह योगासन एक वरदान के जैसा है क्यूंकि इससे ऐंठन कम होती है। इसके नियमित अभ्यास से प्रसव पीड़ा से भी राहत मिलती है और मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में भीमददगार साबित होता है।
: कुंडलपुर,इच्छा के निरोध का नाम तप कहा है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
Fri, Jun 21, 2024
इच्छा के निरोध का नाम तप कहा है,आचार्य श्री समयसागर जी महाराज
कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा शारीरिक मानसिक और आत्मिक यह तीन प्रकार की शांति है ।भूख लगती है प्यास लगती है तो उस क्षुधा पिपासा के शमन के लिए जलपान किया जाता है भोजन आदि किए जाते हैं। उसके माध्यम से कुछ क्षण के लिए शारीरिक जो भूख है वह मिट जाती है तृषा मिट जाती है। किंतु उसके बाद पुनः भूख लगती है इसके उपरांत भरपेट भोजन कर लिया मन के अनुरूप ही स्वादिष्ट भोजन किया इसके बाद भी इच्छा का निरोध नहीं हो पाता। किसी ने कहा महाराज भोजन कर लिया उसके बाद हम 2 घंटे के लिए भोजन का त्याग करते हैं तो यह तप के अंतर्गत आता है कि नहीं ।भरपेट भोजन कर लिया लगभग तीन-चार घंटे लगेंगे डाइजेस्ट होने में उसके पहले एक आध घंटे नहीं लिया तो वह तप के अंतर्गत आएगा ।तो ग्रहस्थ के तप में श्रमण के तप में अंतर क्या है ।दूसरी बात यह है भरपेट भोजन करने के उपरांत अब इच्छा तो है नहीं जब इच्छा नहीं तो इच्छा के निरोध का नाम तप कहा है ।तो निरोध किसका किया ना प्यास लग रही है ना भूख लग रही भोजन करने को बैठ गए भोजन कर लिया अंधों की टोपी चिंता बनी हुई है ।इच्छा का निरोध नहीं कर पा रहा है मानसिक इच्छा है। मन की भूख अभी भी लगी हुई है और उसके लिए वह प्रयत्न करता रहता है इसलिए तप उसको बोलते इच्छा का निरोध किया जाता जिसमें ।कई प्रकार की इच्छाएं होती हैं उनका निरोध ही किया जाता है मोक्ष की इच्छा का भी निरोध कर ले महाराज सब तैयार हो जाएंगे। हमें मोक्ष की क्या आवश्यकता क्योंकि इच्छा का निरोध तप का है। ऐसा नहीं किंतु जिन वस्तुओं के माध्यम से पाप कर्म का अर्जन होता है उसका निरोध होता है उसके संवर के लिए और पाप कर्म की निर्जरा के लिए तप किया जाता है ।वह वहिरंग तप 6 प्रकार का है अनशन अर्थात चारों प्रकार के आहार का त्याग होता है उनोदर का अर्थ भूख से कम लेना भरपेट नहीं लेना इसे उनोदर बोलते इसमें भी बहुत सारे भेद होते चले जाते। रसपरित्याग भी होता षटरस पकवान बनाकर के आप लेते तो उनोदर भी अच्छा लगता क्योंकि सरस भोजन है और नीरस भोजन है तो वह सोचता उपवास करना ही ठीक है। क्योंकि नीरस लिया नहीं जाता यह सब तप है तो अर्थ है गुरुदेव ने भी कहा था अनशन से भी महत्वपूर्ण उनोदर तप है। क्योंकि उपवास करके एकांत में बैठकर के आप स्वाध्याय में लगा सकते हैं जाप अनुष्ठान में लगा सकते हैं भगवान की स्तुति पाठ में उपयोग लगाया जा सकता है। वहां पर तो थाली देखने में नहीं आ रही है इसलिए अनशन तप आसानी से हो सकता है ।उसमें भी कठिनाई है प्रारंभ अवस्था से फिर भी उनोदर की अपेक्षा से तप सरल माना जाता है किंतु जब आप रसोई घर में पहुंच जाते हैं और थाली पर बैठ जाते हैं थाली पर बैठते ही भूख की उदीरणा होती ऐसा कहने में आता अर्थ यह है वहां पर भोजन सामग्री को देखते ही उदीरणा हो जाती है खाने की इच्छा जागृत होती उसको रोकना यह तप माना जाता ।अच्छी भूख लगी है मनचाही वस्तु वहां परोस दी गई है फिर भी मुझे एक ही ग्रास लेना है इस प्रकार संकल्प लेकर वह श्रमण आहार के लिए निकलते हैं इसको अनशन तप से भी महत्वपूर्ण माना। यह कठिन तप माना जाता और रस परित्याग इससे भी कठिन तप ।गुरुदेव का कहना था चौके में जाने के बाद थाली दिखाते हैं तो उस समय रस परित्याग करना। इसलिए कहा वहां कोई चीज दिखाई नहीं दे रही उसी का त्याग कर लेते रसगुल्ला नहीं है और कोई पकवान नहीं है तो उसका मैं आज त्याग कर लेता हूं यह रसपरित्याग नहीं माना जाता अच्छे-अच्छे व्यंजन देखकर उसी का त्याग करना चाहिए।