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: करेली में आयोजित हुआ ज़िला समरसता सम्मेलन समाज में हिंदू भाव जगाने समरस जीवन शैली अपनाना जरूरी

Aditi News Team

Sat, Jun 3, 2023
रिपोर्टर -भागीरथ तिवारी, करेली सामाजिक समरस्ता कार्यक्रम,कर्म आधारित व्यवस्था ही सामाजिक जीवन का सर्वोत्तम मापदंड डॉ आचार्य समरसता स्मारक का हुआ सामूहिक विधिवत लोकार्पण करेली में आयोजित हुआ ज़िला समरसता सम्मेलन समाज में हिंदू भाव जगाने समरस जीवन शैली अपनाना जरूरी करेली। विगत दिवस सरदार पटेल सेवा संस्थान करेली के सौजन्य से समरसता स्मारक एनएच 44 परिसर में जिला समरसता सम्मेलन का आयोजन किया गया ।जिसमें 2 जून को हिंदू सम्राट महाराज छत्रपति शिवाजी जयंती पर हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव के सेअवसर पर समरसता स्मारक का विधिवत लोकार्पण और मूर्ति अनावरण कार्यक्रम संपन्न किया गया। जिला समरसता सम्मेलन में मंचासीन कार्यक्रम में कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ प्रदीप दुबे प्रांत संघचालक महाकौशल प्रांत मुख्य वक्ता डॉ राजकुमार आचार्य कुलपति एपीएस विश्वविद्यालय रीवा अध्यक्षता सत्येंद्र सिंह धोरेलिया सेवानिवृत्त कर्नल भारतीय सेना ठा अवनींद्र सिंह राकेश उदेनिया प्रांत सह सामाजिक सद्भाव प्रमुख श्रीमती प्रभा पटेल इंजी प्रताप पटेल रमाकांत शर्मा प्रेमनारायण रैकवार बडेलाल तिहैया विराजमान रहे। इसके पूर्व प्रातः काल में समरसता स्मारक पर गणेश पूजन हवन और संक्षिप्त अनुष्ठान सनातन रीति नीति से किया गया ।जिसमें महेंद्र नागेश भोला जाटव शीतल चौधरी कोदूलाल बनवारी रमाकांत शर्मा सुरेंद्र मोहन नेमा इत्यादि सर्व समाज के गणमान्य जन पूजन विधान में सम्मिलित हुए। इसके उपरांत पधारे अतिथियों और विशिष्ट जनों की उपस्थिति में राष्ट्रीय समरसता स्मारक का सामूहिक लोकार्पण और मूर्ति अनावरण किया गया ।तत्पश्चात मुख्य अतिथियों ने सभी मूर्तियों पर पुष्पार्चन कर महान विभूतियों को कोटि-कोटि नमन किया। साथ ही भारत माता की पुष्प वंदना की गई। सभी आमंत्रित अतिथियों के द्वारा यह पावन कार्य संपन्न किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ राजकुमार आचार्य में हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव के अवसर पर हिंदू साम्राज्य को पुनर्स्थापित करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की 350 वी जयंती पर हिंदू साम्राज्य की गौरव गाथा का बखान कर उसके महत्व के बारे में विस्तार से बताया। आगे आपने कहा कि हिंदू धर्म को विश्वव्यापी धर्म संस्कृति दर्शन निरूपित किया जाता है। भारतीय प्राचीन आश्रम व्यवस्था एवं वर्ण व्यवस्था को श्रेष्ठ और वैज्ञानिक आधारों पर निरूपित बताया ।साथ ही कर्म आधारित व्यवस्था ही सामाजिक जीवन का सर्वोत्तम मापदंड होती है। जाति उपजाति और समाज के विभाजनकारी प्रोपगेेंडा को लेकर हर समाज और वर्ग को अपनी सोच और धारणा बदलनी होगी। डॉक्टर प्रदीप दुबे ने अपने प्रबोधन में कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माताओं और मनीषियों ने समाज के एकीकरण और समानता का भाव बनाए रखने के लिए जो विधान प्रावधान किए आज उनका लाभ मिलता हुआ दिखाई दे रहा है समाज के बीच दूरियां नगण्य सी हो गई हैं जिनको भी खत्म किया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वक्तव्य में कर्नल धोरेलिया ने बताया कि हिंदू राष्ट्र और समाज को विदेशी और विधर्मी षड्यंत्री सोच को समझना होगा और जातीय रंग में रंगने की वजह समाज व क्षेत्र में हिंदू गौरव और पहचान बनाने की आदत डालनी होगी। कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए विनोद नेमा ने कहा एकरस और समरस समाज का निमार्ण कार्य करने की जरूरत है। राकेश उदेनिया ने समाज में सद्भाव सौहार्द समरस जीवन को समाज में संगठन ,समानता और सुदृढ़ीकरण के लिए जरूरी बताया। वक्ताओ द्वारा बताया गया कि समरसता स्मारक में राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने वाले राष्ट्र शिल्पी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विशालकाय प्रतिमा स्थापित करने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित समरसता स्मारक राष्ट्रीय स्तर का पुनीत कार्य है। इनके साथ ही नरसिंहपुर जिले की चार महान विभूतियो की चार मुख्य प्रतिमाएं दानवीर चौधरी राघव मिश्र , नरसिंहपुर जिले में हिंदुत्व के पुरोधा प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय रोशन सिंह धोरेलिया, शिक्षाविद एवं कर्मयोगी स्वर्गीय ठाकुर निरंजन सिंह तथा जनसहयोग और निजी धन से नरसिंहपुर में हरेराम धर्मशाला का निर्माण कराने वाले स्वर्गीय हरेराम रैकवार बाबा के रूप में जाने जाने वाले की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। कार्यक्रम के उपरांत अतिथियों द्वारा समरसता स्मारक पर कार्यक्रम की स्मृतियां अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पौधारोपण भी संपन्न किया।कार्यक्रम का मंच संचालन कमलेश कौरव सामाजिक समरसता प्रमुख ने किया एवं समरसता स्मारक की परिकल्पना को प्रारंभ से ही साकार करने में लगे इंजीनियर प्रताप पटेल ने कार्यक्रम में पधारे विशिष्ट अतिथियों गणमान्य नागरिकों और जनमानस का आभार व्यक्त किया।समरसता सम्मेलन में जिले भर से निवासरत समस्त समाज और बिरादरी के प्रबुद्ध जन ने आकर सहभागिता की।

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