: शेषाअवतार स्वामी रामानुजाचार्य जी की 1008 वी जयंती,संक्षिप्त परिचय
Aditi News Team
Sat, May 3, 2025
शेषाअवतार स्वामी रामानुजाचार्य जी की 1008 वी जयंती,संक्षिप्त परिचय,
अशोक मोलासरिया गाडरवारा द्वारा प्रेषित
एक भारतीय हिन्दू दार्शनिक गुरु व समाज सुधारक वंचितों के प्रति संवेदना, सामाजिक समरसता व समता के प्रतीक, ध्वजा वाहक श्री श्री स्वामी रामानुजाचार्य जी की 1008 वी जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं । आपको भगवान बलरामपुर जी का अवतार माना जाता है और भगवान विष्णु जी को आराध्य देव मानते हुए अपनी धर्म यात्रा को सफल बनाया ।
संक्षिप्त परिचय
आपका जन्म 1017 ई में श्री पेरंबदूर गांव में हुआ था इनके पिता का नाम केशव भट्ट था जो कि ब्राह्मण समुदाय से आते थे जो वर्तमान में तमिलनाडु प्रांत में आता है बाल्य काल में उन्होंने कांची जाकर गुरु यादव प्रकाश से वेदों की शिक्षा ली रामानुजाचार्य जी अलवर संत यमुना आचार्य जी के प्रधान और होनहार शिष्य थे ।
गुरु के निर्देशानुसार रामानुज से तीन कामों का विशेष संकल्प कराया गया pahla Braham Sutra dusra Vishnu sahstranaam Teesra Divya Prabandhaknam, की टीका लेखन करना / उन्होंने गृहस्थ आश्रम त्याग कर श्रीरंगम के यतीराज नामक सन्यासी से संन्यास की दीक्षा ली।
मैसूर के श्री रंगम से चलकर रामानुज जी शालिग्राम नामक स्थान पर रहने लगे 12 वर्षों तक इस क्षेत्र में वैष्णो धाम का प्रचार किया, तदुपरांत वैष्णव सम्प्रदाय और धर्म के लिए पूरे भारत वर्ष में भ्रमण कर धर्म चेतना को संचारित कर अपना विशिष्ट योगदान किया / 1137 ईस्वी में 120 वर्ष की आयु पूर्ण कर परमपद बैकुंठवास प्राप्त कर ब्रम्हलीन हुए ।
आपके व्दारा अनेक ग्रन्थों का लेखन किया गया किन्तु ब्रह्म सूत्र भाष्य पर लिखे गये उनके दो मल ग्रन्थ सर्वाधिक लोकप्रिय हूए - श्रीभाष्यम एंव वेन्दात संग्रहम जो आज भी प्रासंगिक है ।
रामानुजार्य जी की स्मृति में फरवरी 2022 बंसत पंचमी को 216 फीट ऊंचाइ की प्रतिमा हैदराबाद में अनावरण कर उनकी प्रासंगिकता को अक्षुण बनाये रखने का प्रयास किया गया है ।
श्री राम की भक्ति में लीन वेन्दात के अव्दितीय प्रकाश, अव्दैतवाद को विशिष्ट व्देत वेदांत का आकार देने वाले समाज में समरसता, भक्ति, और ज्ञान की अलख जगाने वाले महान क्रांतिकारी संत श्री श्री रामानुजार्य जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्पद है ।उनकी शिक्षा आज भी सनातन धर्म की मूल भावना को सशक्त बनाती है और समस्त मानवता को एकता, सेवा, वंचितों के प्रति संवेदना की भावना उनकी अमूल्य देन है ।
रामानुजाचार्य जी की 1008 वी जयंती पर कोटि-कोटि नमन वंदन और स्मरण करते हुए साष्टांग दंडवत प्रणाम आपके व्दारा बताया गया मार्ग सदा राष्ट्र को प्रेरित कर्ता रहेगा ।
जयश्री मन्नारायण सहित सादर रामानुजदास
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