: सिर्फ शिक्षकों के लिए ई अटेंडेंस योजना स्वीकार नहीं सिहोरा में शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
Sat, Jun 28, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
सिर्फ शिक्षकों के लिए ई अटेंडेंस योजना स्वीकार नहीं
सिहोरा में शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
सिहोरा
- ई अटेंडेंस योजना लागू करना है तो इसे केवल शिक्षक संवर्ग के लिए ही क्यों ?क्या प्रदेश में केवल शिक्षक ही शासकीय कर्मचारी है। ई अटेंडेंस योजना को शिक्षक के सम्मान पर प्रश्नचिन्ह बताते हुए राज्य शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि सरकार इस योजना को एक साथ सभी विभागों में लागू करे, शिक्षक इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता करेगा।राज्य शिक्षक संघ के आह्वान पर आज प्रांत व्यापी प्रदर्शन के आह्वान पर सिहोरा में सैकड़ो की संख्या में शिक्षकों ने एकत्र होकर मुख्यमंत्री के नाम नायब तहसीलदार जयभान सिंह उईके को ज्ञापन सोपा। अपने ज्ञापन में शिक्षकों ने कहा कि वह मध्य प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्र में अग्रणी स्थान के लिए सतत प्रयत्नशील हैं । इस वर्ष का शासकीय स्कूलों का परीक्षा परिणाम प्राइवेट स्कूलों से बेहतर आना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक पूर्ण मनो योग से बेहतर कार्य कर रहा है। ऐसी दशा में ऐसे अनुकूल वातावरण में ऐसी अटेंडेंस जैसी अपमानजनक योजना को लागू करना शिक्षक को हतोत्साहित करता है। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि मध्य प्रदेश के समस्त विभागों में एक साथ ही अटेंडेंस योजना प्रारंभ करें।आज ज्ञापन सौंपते समय संघ के जिला अध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी प्रांतीय सदस्य नरेंद्र खंपरिया, तहसील अध्यक्ष अरविंद उपाध्याय, सचिव रवि प्रकाश दुबे, प्रदीप प्यासी, समीर गुप्ता, मुकेश मेहरा ,प्रमोद नामदेव,धनेश्वर परोहा, अनिल खरे,दीप चंद तंतुवाय,सतीश मिश्रा, रामजी पटेल, प्रकाश पांडे, उमेश सैनी, प्रकाश सेन,मुकेश कुचया, जीवेश मिश्रा, राजीव मिश्रा, दीपक गौतम, जितेंद्र पांडे,प्रदीप झारिया,विष्णु पटेल, शशि भूषण पांडे ,मथुरा उपाध्याय, मनीष पटेल, अखिलेश दाहिया, प्रकाश पटेल, केके शर्मा, प्रदीप पटेल,सुरेश तिवारी,महेश कुर्मी,संतोष ठाकुर,प्रकाश सेन,आनंद पटेल,दीपक गौतम,विजयंत खरे सहित सैकड़ो की संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
: हिरन नदी में लौटी 'जान', दो दिन की बरसात से कलकल बहने लगी नदी
Sat, Jun 28, 2025
रिपोर्टर अनिल जैन
हिरन नदी में लौटी 'जान', दो दिन की बरसात से कलकल बहने लगी नदी
सिहोरा क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली हिरन नदी, जो मानसून के पूरी तरह सक्रिय न होने और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण लगातार तीसरी बार सूख गई थी, सोमवार रात और मंगलवार सुबह हुई मानसूनी बारिश के बाद एक बार फिर कल-कल बह उठी है। घाटसिमरिया स्थित जलविहीन हिरन नदी में ऊपरी क्षेत्रों से बरसाती पानी एकत्रित होकर लगभग 3 बजे के आसपास तेज बहाव के साथ पहुंचा, जिससे नदी किनारे बसे गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, यह अस्थाई राहत इस बात पर जोर देती है कि क्षेत्र को स्थायी जलसंकट से उबारने के लिए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।*तीसरी बार सूखी थी नदी, ग्रामीणों में थी गहरी चिंता...जून माह के अंत में हिरन नदी की जलधारा का फिर से बंद हो जाना, इस भीषण गर्मी में पानी की कमी की चिंता को और बढ़ा रहा था। मानसून से पहले ही मुख्य कैनाल से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई थी, जिससे हिरन नदी में पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इससे पहले, इसी जून माह में बरगी दांयी तट की मुख्य कैनाल से कुछ समय के लिए पानी छोड़े जाने से नदी में प्रवाह लौटा था, लेकिन मानसून की धीमी गति के कारण यह राहत अल्पकालिक साबित हुई और नदी एक बार फिर रेगिस्तान जैसी दिख रही थी।ग्रामीण क्षेत्रों में भयावह स्थितिहिरन नदी का लगातार सूखना और भूजल का अनियंत्रित दोहन इस गंभीर संकट का मुख्य कारण बन गया है।*गांव गांव आई खुशी...इससे हिरन नदी से लगे दर्जनों गांवों जैसे खिन्नी, कैथरा, चन्नौटा, मल्हना, कूड़ा, कंजई, घाटसिमरिया, मोहतरा, ताला, देवरी, और शहजपुरा में पीने के पानी की भारी कमी हो गई थी। भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा था, और कई गांवों में हैंडपंप पूरी तरह से सूख गए थे। ग्रामीण इलाकों में लोग पेयजल के लिए खेतों के बोरवेल पर निर्भर होने को मजबूर थे,मंगलवार को जैसे ही हिरन नदी के किनारे स्थित गांव से नदी का पानी प्रवाहित हुआ, आमजन ने राहत की सांस ली।*विशेषज्ञों की चेतावनी और ग्रामीणों की उम्मीद...विशेषज्ञों का मानना है कि हिरन नदी का पानी ही इन क्षेत्रों में जलस्रोतों में पीने के पानी का स्तर बनाए रखता है। जून माह में तापमान में वृद्धि के साथ, यह जलसंकट और भी विकराल रूप ले रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि अच्छी बरसात होने पर ही हिरन नदी में पानी की आस है। इस संबंध में समाचार का प्रकाशन कर मानसून से हिरन नदी भरने की आस लगाए बैठे लोगों की भावनाओं से संबंधित समाचार का प्रकाशन किया गया था।सोमवार रात और मंगलवार सुबह की बारिश ने उनकी इस आस को पूरा किया है।अस्थाई राहत, स्थायी समाधान की दरकारवर्तमान में हुई बारिश से मिली यह राहत निश्चित रूप से तात्कालिक है। स्थानीय प्रशासन और सरकार से इस गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान देने और स्थायी समाधान खोजने की अपील की जा रही है, ताकि क्षेत्र को इस गंभीर जलसंकट से उबारा जा सके। इसमें जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, और सिंचाई के लिए वैकल्पिक जल स्रोतों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में हिरन नदी के सूखने की समस्या से बचा जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
: आत्मा से कटे वाई-फाई से जुड़े
Fri, Jun 27, 2025
आत्मा से कटे वाई-फाई से जुड़े
(सुशील शर्मा) हम अब एक-दूसरेके पास नहीं रहे,हाथ से हाथ छूटे नहीं,पर छूने की इच्छा मर चुकी है। बगल में बैठा इंसानअब बस एक स्थिति हैन ज़िंदा, न मरा,बस उपस्थित। हमने आंखों मेंदेखना छोड़ दिया है,क्योंकि वहां अब सवालनहीं जलते,बल्किउत्तर माँगते चेहरे बैठे हैंथके, झुके, संशय में डूबे। हम बात करते हैं,पर बातें नहीं होतीं,जैसे शब्दों ने आत्मा छोड़ दी हो।हम मुस्कराते हैं,पर वो मुस्कराहटकिसी खोखली दीवार परटंगे पुराने कैलेंडर सी लगती हैजिसे कोई देखता नहीं अब। जब कोई टूटता है अब,तो आवाज़ नहीं आती,क्योंकि हम इतने ‘मग्न’ हैंअपनी टूटी हुई स्क्रीन में,कि असली दरारेंदेख ही नहीं पाते। हम संवेदनशील हैंपर दुनिया के लिए,कभी-कभी।अपने पड़ोस के लिएहम निर्लिप्त हैं,अपनों के आँसुओं के लिएहम व्यस्त हैं। कोई अपना दुख कहता है,तो हम उसेमानसिक बीमार कहते हैं।किसी की पीड़ाअब समाचार बनती है,सम्बंध नहीं। क्या तुमने महसूस किया हैकभी-कभी लोगमुस्कराते हुए भीसिसक रहे होते हैं?और हम,इतने अभ्यस्त हो चुके हैंशोर केकि वो सिसकी अबहमारे कानों तक नहीं आती। हम,जो एक समय मेंआश्रय थे एक-दूसरे के लिए,अबअजनबी कमरों मेंवाई फाई के ज़रिए जुड़ेपर आत्मा से अलग लोग हैं। हमें रिश्ते नहीं चाहिए,हमें नेटवर्क चाहिए।हमें सत्य नहीं चाहिए,हमें सुविधा चाहिए।हमें संवाद नहीं चाहिए,हमें स्टेटस अपडेट चाहिए। कभी-कभी सोचता हूँक्या इंसान अभी भी इंसान है?या वो धीरे-धीरेएक प्रतिक्रिया बन चुका है,जिसे कोई लाइक कर देतो अच्छा लगता है,वरनावो ख़ुद को हीअनदेखा करता है।✒️सुशील शर्मा✒️