पति की दीर्घायु की कामना से रखा उपवास : सातुड़ी तीज पर घर-घर हुई पूजा
Aditi News Team
Wed, Sep 2, 2026
पति की दीर्घायु की कामना से रखा उपवास, सातुड़ी तीज पर घर-घर हुई पूजा
गाडरवारा। राजस्थानी मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से विभिन्न स्थानों पर लोक परंपराओं के संवर्धन की दिशा में अनेक पावन पर्व मनाए जाते हैं। इसी श्रृंखला में गत रात्रि महिलाओं ने सातुड़ी तीज की स्थापित परंपरा के अनुसार उत्साह और उमंग के साथ पर्व मनाया। विशेष रूप से नवविवाहिता महिलाओं ने अपनी पहली सातुड़ी तीज पर बढ़-चढ़कर सहभागिता की तथा सुहाग के मंगलमय श्रृंगार में नए आभूषणों से सज-धजकर पूजा-अर्चना की।
उल्लेखनीय है कि इस दिन महिलाएं अपने जीवनसाथी पति के साथ जन्म-जन्मांतर तक रहने तथा अपने परिवार एवं परिजनों की समृद्धि के लिए भगवान शिव एवं माता पार्वतीजी के सम्मुख कामना-प्रार्थना करती हैं। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा उपवास भी रखा जाता है। निम्बोड़ी की पूजा-अर्चना एवं कथा वाचन के उपरांत चन्द्रमा के दर्शन तथा पूजा-अर्चना करने के बाद महिलाएं अपना उपवास पूर्ण करती हैं।
सातुड़ी तीज के नाम से जाने जाने वाले इस पावन दिवस पर गेहूं, चावल एवं चना आदि का सत्तू बनाकर उससे मीठा व्यंजन तैयार करने की परंपरा है। वहीं महिलाएं इस दिन एक-दूसरे के घर जाकर पांव-धोक पैर पडना अपने बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
सातुड़ी तीज पर बनने वाला यह विशेष मिष्ठान समाज के विभिन्न वर्गों में सर्वप्रिय है। आज भी अनेक परिवार अपने परिचित एवं निकटस्थ लोगों को आमंत्रित कर सत्तू का रसास्वादन कराने की पुरानी परंपरा को बनाए हुए हैं। अनेक लोगों को इस विशेष व्यंजन का पूरे वर्ष इंतजार रहता है, क्योंकि यह व्यंजन बाजार अथवा मारवाड़ी परिवारों के अलावा सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं होता। इसका स्वाद अपने आप में अलग और विशिष्ट होता है तथा इसकी पहचान भी विशेष है।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
राजस्थानी मारवाड़ी समाज गाडरवारा