: संस्कृत को अनिवार्य बनाने की मांग: मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्टर अनिल जैन
संस्कृत को अनिवार्य बनाने की मांग: मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सिहोरा: संस्कृत भारती, जबलपुर तथा जिला संस्कृत प्रकोष्ठ प्रभारी और संस्कृत शिक्षकों ने आज जबलपुर कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कक्षा 9वीं से 12वीं तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में लागू करने की मांग की गई। 'जयतु संस्कृतम्' और 'जयतु भारतम्' के उद्घोष के साथ सौंपे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा सूत्र और बहुभाषिकता पर जोर दिया गया है, और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कृत भाषा अत्यंत आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने चिंता व्यक्त की कि विद्यालयी शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा को त्रिभाषा के विकल्प के रूप में लागू किया जा रहा है, जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से त्रिभाषा नीति के लिए हानिकारक है। उनका तर्क है कि संस्कृत भाषा के स्थान पर व्यावसायिक शिक्षा को महत्व देना उचित नहीं है, खासकर जब संस्कृत को भारत की आत्मा माना जाता है। उन्होंने इसे नवीन शिक्षा नीति 2020 के नियमों का उल्लंघन बताया।
ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि इस स्थिति में सुधार के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य किया जाए और व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में स्थान दिया जाए, ताकि संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन हो सके। शिक्षकों ने हरियाणा बोर्ड और दिल्ली बोर्ड का उदाहरण भी दिया, जहां संस्कृत विषय को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया गया है, और इसी प्रकार मध्य प्रदेश में भी विद्यालयी शिक्षा विभाग में संस्कृत को अनिवार्य भाषा के रूप में स्थान देने की मांग की।
संस्कृत शिक्षकों ने जोर देकर कहा कि संस्कृत भाषा को वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य भाषा के रूप में स्थान मिलना चाहिए, और उन्होंने कक्षा 1 से कक्षा 12वीं तक संस्कृत को अनिवार्य किए जाने की अपनी बात रखी। इस अवसर पर डॉ. राधिका प्रसाद मिश्रा, अवधनारायण मिश्रा, सत्यनारायण द्विवेदी, चंद्रावली सोनी, सीमा भसीन, शैलेन्द्र पंडा, सत्येन्द्र कुमार दीक्षित, ओम प्रकाश तिवारी, धीरेन्द्र पाण्डेय, कन्हैया कुमार आर्य, चंचल धाणक, दीपक विनायक, आरती झरिया, रिक्खीराम झरिया, विनोद कोरटकर, अर्पित जैन आदि उपस्थित थे।
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