: मध्य प्रदेश किसान सभा राज्य कमेटी बैठक सम्पन्न
Sun, May 11, 2025
मध्य प्रदेश किसान सभा राज्य कमेटी बैठक सम्पन्न
मध्य प्रदेश किसान सभा के संयुक्त सचिव जगदीश पटेल ने बताया कि किसान सभा के प्रदेश प्रभारी सांसद एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम एवं बादल सरोज के मार्गदर्शन में ग्वालियर में सम्पन्न हुई, जिसमें विभिन्न जिलों के किसान सभा के पदाधिकारी उपस्थित रहे।कामरेड अमराराम ने कहा अमरीका की मध्यस्थता देश कभी स्वीकार नहीं करेगा सर्वदलीय बैठकों में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति खेदजनक युद्धविराम की घोषणा एक अच्छी और स्वागतयोग्य बात है किन्तु अमरीका द्वारा इसके लिए की गयी मध्यस्थता की खबर चिंताजनक बात है । आजादी के बाद से लेकर आज तक चाहे कश्मीर का सवाल हो या पाकिस्तान अथवा किसी भी और देश के साथ सीमा विवाद का प्रश्न भारत की यह नीति रही है कि वह किसी भी तीसरी शक्ति के हस्तक्षेप या भूमिका को स्वीकार नहीं करेगा । पहलगाम के जघन्य और निंदनीय आतंकी हमले के बाद के घटना विकास में अमरीका के चौधरी बनने की कोशिश इस नीति के विपरीत है । प्रधानमंत्री को इस बारे में स्थिति साफ़ करना चाहिए । भारत की जनता अमरीकी मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं करेगी । यह बात देश के प्रमुख किसान नेता, लोकसभा सांसद अमरा राम ने आज ग्वालियर में कही ।उन्होंने कहा कि पहलगाम के कायराना आतंकी हमले के मुजरिमों को सजा दिलाने के लिए पूरा देश एकजुट है । सारे विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर पूरी तरह सरकार का साथ दिया । आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्यवाही के लिए देश एकजुट है मगर क्या केंद्र सरकार इसके प्रति उतनी गंभीर है ?यह सवाल उठाते हुए सांसद अमरा राम ने दोनों सर्वदलीय बैठकों में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को खेदजनक बताया । यह गैरजिमेदारी की बात है कि देश पर इतने गंभीर संकट और हमले के बाद हुई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने और देश की अगुआई करने की बजाय प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की चुनावी सभा में भाग लेना जरूरी समझा । दूसरी बैठक में भी शामिल होने की बजाय वे अन्य व्यावसायिक घरानों के समारोहों में शामिल होते रहे । यह देश की अखण्डता और एकता के प्रति सारे देशवासियों की भावनाओं का अपमान जैसा है ।
सांप्रदायिक सौहाद्र जरूरी
अखिल भारतीय किसान सभा के उपाध्यक्ष और सीपीएम पोलिट ब्यूरो सदस्य अमरा राम ने कहा कि देश की वास्तविक एकता बनाने और मजबूत करने का काम मेहनतकश मजदूर किसान ही कर सकते है। उन्होंने कहा कि मौजूदा साम्प्रदायिक गंठजोड़ भावनात्मक मुद्दों पर ध्यान भटकाकर बड़े घरानों के लिए सारा देश की लूट की खुली छूट देने वाली विनाशकारी कदमों वाली, जनता के विराट बहुमत की जिंदगी को मुश्किल बनाने वाली नीतियों के खिलाफ लड़ते हुए उसने यह विराट एकता बनाई है । एतिहासिक किसान आन्दोलन इसका उदाहरण है ।
20 मई देशव्यापी हड़ताल सफल करने का आव्हान किया
उन्होंने कहा कि यही मुहिम आगे भी जारी रहेगी – श्रमिक कर्मचारी संगठनों द्वारा 20 मई की देशव्यापी आम हड़ताल का आव्हान इसी तरह की कार्यवाही है । अखिल भारतीय किसान सभा और संयुक्त मोर्चे ने इसका समर्थन किया है । कार्पोरेट और कंपनियों के बढ़ते शोषण से देश और उसकी जनता को बचाने के लिए होने वाली यह आम हड़ताल मेहनतकश जनता की एकता को फौलादी बनाएगी ।आज सुबह से शुरू हुई मध्यप्रदेश किसान सभा की राज्य कार्यकारिणी बैठक को संबोधित करते हुए अमरा राम ने मध्यप्रदेश में किसान आन्दोलनों को और तेज करने का आव्हान करते हुए कहा कि किसानों तथा ग्रामीण आबादी की हर समस्या का समाधान उनकी एकता और संघर्ष को मजबूत बनाकर ही किया जा सकता है । अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज भी इस बैठक में रहे ।इस राज्य स्तरीय बैठक की अध्यक्षता पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अशोक तिवारी ने की । महासचिव अखिलेश यादव ने इस बैठक के विचारार्थ समग्र रिपोर्ट रखी । प्रदेश भर से आये राज्य कार्यकारिणी सदस्यों ने अपने अपने जिलों की हालात का ब्यौरा रखा । सांसद अमरा राम ने इस बैठक सहित कई अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया ।
: गो अभयारण्य सालरिया में 10 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर 07 जून से
Sun, May 11, 2025
गो अभयारण्य सालरिया में 10 दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर 07 जून से
सुसनेर।जनपद सुसनेर में मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं विश्व के लोक प्रसिद्ध गो सेवा संस्थान श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संरक्षक एवं संस्थापक परम श्रद्धेय गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशरणानन्द जी महाराज के पावन सानिध्य एवं 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं आध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता व श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के राष्ट्रीय संयोजक ग्वाल सन्त पूज्य स्वामी गोपालानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य "श्री कामधेनु गो अभयारण्य सालरिया,तहसील सुसनेर,जिला आगर मालवा (म.प्र.) में मध्यप्रदेश के गो सेवक मुख्यमंत्री महोदय डॉक्टर मोहन जी यादव ने अपने 61 वें जन्मदिवस 25 मार्च 2025 को क्षेत्र के बालकों के लिए भगवती गोमाता के सानिध्य में उज्जवल भविष्य हेतु "श्री कामधेनु गुरुकुलम" का शुभारंभ किया है ।उक्त कामधेनु गुरुकुलम में क्षेत्र के बालकों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए आगामी 07 जून 2025 से 17 जून 2025 तक 10 दिवसीय आवासीय व्यक्तित्व निर्माण शिविर का आयोजन भारत में युवाओं के लिए व्यक्तित्व विकास में कई वर्षों से कार्य कर रहें संस्थान "सूर्या फाउंडेशन दिल्ली" के कुशल प्रशिक्षकों द्वारा होने जा रहा है जिसमें बालकों के शारीरिक,मानसिक एवं बौद्धिक विकास के साथ साथ बालकों में अनेक प्रकार की विधाओं का विकास 7000 गौमाताओं के सानिध्य में होने जा रहा है ।व्यक्तित्व विकास शिविर में कक्षा 06 वीं से 10 वीं तक के बालक अपेक्षित है, पंजीयन निम्न गूगल लिंक https://forms.gle/1TpPBpHvMv45dW8r7 के माध्यम से व्यक्तित्व विकास शिविर के लिए पंजीयन करवाया जा सकता है।
: माँ बस माँ होती है,,माँ – एक अनकही प्रार्थना,, पं.- सुशील शर्मा की कलम से
Sun, May 11, 2025
माँ बस माँ होती है
(एक कविता - सुशील शर्मा)
वो थकी नहीं कभी,जब मैं थक करउसकी गोद में सो गया। उसके हाथों में चूल्हे की राख थी,पर माथे पर चाँदनी थी,जिसे वो हर रात मेरी नींदमें रख आती थी। माँवो शब्द नहीं,जिसे बोला जाए,वो स्पर्श है,जिसे महसूस किया जाता हैजब जीवन हमें चोट करता है। जब दुनिया ने पूछा कौन है तुम्हारे साथ?मैंने कुछ नहीं कहा,पर भीतर कोईहाथ पकड़ चुका था…सहारा दे चुका था। वो हर सुबह मेरे लिए अपनेहिस्से की रोटी भूल जाती थी,हर शाम मेरी थकानअपने सिर पर बाँध लेती थी। उसकी प्रार्थनाएँ मेरी राह मेंचुपचाप बिछ जाती थीं,रोक लेती हैं उन बद्दुआओं कोजो मेरी ओर तूफान बन करआती हैंएक कवच जो बिछ जाता हैमेरी सुरक्षा में,मेरे व्यक्तित्व के चारों ओर।आँसू कभी मेरीआँखों में नहीं आने दिए उसने।उसका नेह वात्सल्य शोख लेता है हर आँसू को। अब जब मैं लौटता हूँ,वो दरवाज़े पर नहीं होती,वह कर रही होती है घर केवो सब काम जिनमें मैंहोता हूँ शामिलपर हर आहट में,हर खुशबू में,हर अधूरी नींद मेंमैं माँ को पाता हूँ। कभी-कभी लगता है,मैंने ईश्वर को नहीं देखा,पर जब भी माँ की झुर्रियों को छुआ,वो स्पर्श किसी आशीर्वाद जैसा लगा। माँ अब भी वहीं है,जहाँ से उसने मुझे जीवन में भेजा थाप्रेम के सबसे गहरे कोने में।उसका झुर्रियों वाला शरीरअब भी मुझे समझता हैएक शिशु।एक शिशु जो उसके अस्तित्वसे निकल कर फैला हैवृक्ष की तरहपर इस वृक्ष की जड़ेंआज भी पोषित हैंमाँ के वात्सल्य से। ✒️
सुशील शर्मा
✒️ *
माँ – एक अनकही प्रार्थना*
(आलेख - सुशील शर्मा)
माँ की व्याख्या मेरे बस में तो नहीं पर कुछ टूटे फूटे शब्द हैं जिसे तुतलाती भाषा में उसका आँचल पकड़ कर कह रहा हूँ।कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, स्पर्श से बँधते हैं। कुछ प्रेम आँखों से नहीं, निशब्द त्याग से प्रकट होते हैं। माँ यह कोई नाम नहीं, यह एक संपूर्ण भावना है, जो जीवन की हर पीड़ा पर मरहम बनकर उतरती है। जब हम पहली बार सांस लेते हैं, उस पल हमारे अस्तित्व का जो सबसे पहला और सबसे गहरा सम्बन्ध बनता है, वह माँ से होता है। वह हमारी पहली भाषा होती है, पहला स्पर्श, पहला संगीत। हमारी धड़कनों से पहले उसकी चिंता की धड़कनें जन्म लेती हैं। माँ के आँचल में छुपा था वह ब्रह्मांड, जिसमें डर भी सुरक्षित लगता था। जब बुखार में हम तपते थे, तब माँ का हाथ माथे पर ठंडी चाँदनी बन जाता था। जब परीक्षा में नंबर कम आए, तो वही माँ थी जो आँसू पोंछते हुए कहती "कमी नंबरों में नहीं, इस दुनिया की समझ में है बेटा!" माँ का त्याग कभी मुखर नहीं होता। वह रातभर जागती है, पर थकान उसकी आँखों में नहीं, हमारी सलामती में छुपी होती है। वह खुद भूखी रह जाती है, पर हमारी थाली कभी खाली नहीं रहने देती। उसके प्रेम का कोई शोर नहीं होता, पर वह हर कोने में प्रतिध्वनित होता है। समय के साथ हम बड़े हो जाते हैं, माँ छोटी हो जाती है। उसकी कमर झुक जाती है, पर हमारी ऊँचाई पर गर्व करती आँखें आज भी सीधी रहती हैं। किस तरह माँ इस दुनिया के बियाबान में औलाद को पालती है ,किस तरह एक एक दाना उनके मुँह में डाल कर चुगाती है,और फिर बच्चे फुर्र उड़ जाते है उसे अकेला छोड़ कर।हम दुनिया की बातों में उलझ जाते हैं, वह आज भी हमारे खाने-पीने, ओढ़ने-बिछाने की फिक्र करती रहती है। माँ कोई स्थान नहीं छोड़ती, पर हम कई बार उसे पीछे छोड़ देते हैं ,शहर की भीड़ में, अपने सपनों की दौड़ में। और फिर एक दिन, जब माँ की उँगलियाँ शिथिल हो जाती हैं, और उसका झुर्रियों भरा चेहरा नज़रों से ओझल हो जाता है, तब समझ आता है कि हमने जीवन की सबसे बड़ी कविता को कभी ध्यान से पढ़ा ही नहीं। माँ कोई व्यक्ति नहीं, वह एक प्रार्थना है, जो जीवन भर हमारे लिए मौन जप करती रहती है।वह वह सूरज है, जो हमारे अंधेरों को अपने भीतर छुपा लेता है। आज भी जब कोई दुःख घेर लेता है, तो अनायास मन कह उठता है"माँ!"शायद इस एक शब्द में ही संपूर्ण जीवन की शांति छुपी है। ✒️
सुशील शर्मा
✒️