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रासायनिक दवाओं के बीच मूर्तियों की बिक्री और आस्था का खिलवाड़

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क्या व्यवसाय के आगे मर्यादा खत्म हो चुकी है? : रासायनिक दवाओं के बीच मूर्तियों की बिक्री और आस्था का खिलवाड़

Aditi News Team

Mon, Sep 14, 2026

रासायनिक दवाओं के बीच मूर्तियों की बिक्री और आस्था का खिलवाड़:

क्या व्यवसाय के आगे मर्यादा खत्म हो चुकी है?

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि भगवान श्री गणेश और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को रासायनिक दवाओं, कीटनाशकों (जैसे Ulka Zyme, Prochem आदि) और प्लास्टिक की टंकियों के बीच सजाकर बेचा जा रहा है।

यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

आस्था और पवित्रता का अपमान: भगवान गणेश जी, जिन्हें हम विघ्नहर्ता, शुभ-लाभ और जीवन के दाता मानते हैं—उन्हें रासायनिक विष और कीटनाशकों के बीच रखकर बेचना धार्मिक मर्यादा और शुद्धता के सख्त खिलाफ है।

कुम्हार समाज की रोजी-रोटी पर संकट: जो पारंपरिक कुम्हार समाज पूरी निष्ठा, पवित्रता और मेहनत से पीढ़ियों से मूर्तियां बनाकर अपना जीवन-यापन करता है, इस तरह व्यावसायिक दुकानों पर मूर्तियां बिकने से उनके आजीविका का हक छीना जा रहा है।

नैतिकता और जिम्मेदारी का अभाव: केवल अपने निजी फायदे के लिए मठ-मंदिर, आस्था और परंपराओं की अनदेखी करना चिंताजनक है।

जब आस्था को सिर्फ मुनाफा कमाने का जरिया बना लिया जाए, तो समाज और संस्कृति दोनों का नुकसान होता है।

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जय गणेश

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