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: वक्फ बिल की भांति गोचर से अतिक्रमण हटाने के लिए बिल लाएं मोदी सरकार स्वामी गोपालानंद सरस्वती

Aditi News Team

Thu, Apr 3, 2025
वक्फ बिल की भांति गोचर से अतिक्रमण हटाने के लिए बिल लाएं मोदी सरकार,स्वामी गोपालानंद सरस्वती सुसनेर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के उपसंहार उत्सव के पंचम दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि बताया कि जब से जीवन से गो को निकाला है,तब से तब से अहम भाव बढ़ा है क्योंकि गो न रखने से विकार बढ़ता है,विचार नष्ट हो जाते है और सद विचारों का खात्मा हो जाता है जिससे जीवन में भय,कामनाएं,लाभ,मोह और क्रोध बढ़ने लगता है,इन सब दुर्दशा से बचने का एक मात्र साधन है नि:ष्काम भाव से गो सेवा और जब हम कामना रहित भगवती गोमाता की सेवा करते है तो मन में कोई इच्छा,कोई कामना नहीं होती तब जीवन का जीवन का वास्तविक मूल्य समझ में आता है क्योंकि जीवन में चिन्ता का सबसे बड़ा मूल कारण चाह है, इसलिए कहां भी गया है कि "चाह गई, चिन्ता मिटी" चाह जब तक रहेगी चिन्ता मिटेगी नहीं इसलिए चिंता को मिटाना है तो चाह को मिटाना होगा और आह मिटेगी तो वाह मिलेगी। स्वामीजी ने आगे कहा कि गाय माता हमारी माता है, इस बात को हम भूल नहीं सकते। गाय माता हमें सुख देती है।गाय हमारी देवता है इसलिए उक्त तीन बातों को हमें सदा ध्यान में रखना चाहिए। इसलिए पहले गाय माता की सेवा हो पूजा हो और फिर गाय माता की सुरक्षा भी हो और हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि बीते हुए समय में,वर्तमान एवं भविष्य इन तीनों काल में गाय हमारी माता रहेगी। इसलिए मानव जीवन में गाय मां की सेवा करके जीवन को सफल बनाए और भारत का प्रत्येक सनातनी परिवार अपने अपने घर में एक गोमाता की सेवा अवश्य करें । स्वामीजी ने प्रभु को पाने के तीन रास्ते बताए है जिसमें से पहला ज्ञान के द्वारा दूसरा भक्ति के द्वारा और तीसरी सेवा के द्वारा और जीवन का मौज सिर्फ गाय माता सेवा से ही मिलेगा और अगर जीवन में गोव्रत अर्थात पंचगव्य का उपयोग कर प्रभु की नि:ष्काम भाव से सेवा की जाएं व भगवान को गो गव्य से बने प्रसाद का भोग लगाएं तो भगवान की भक्ति का इससे बड़ा कोई माध्यम हो ही नहीं सकता इसलिए प्रभु को पाना है तो हर सनातनी को गोवर्ती बनना होगा अर्थात हमें भेस,बकरी अथवा नकली दूध से बचकर केवल गोमाता के दूध से बने प्रसाद को ही भगवान को भोग लगाकर उसे ग्रहण करना चाहिए । महाराज जी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी से आग्रह किया कि जब आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब आपने गो रक्षा का कानून बनाने की बात कही थी और आप अपने प्रधानमंत्रीकाल में सनातन संस्कृति को बचाए रखने का हर संभव प्रयत्न कर रहें है और कल भी आपकी सरकार ने वक्फ बिल पास करके एक ऐतिहासिक कार्य किया है, उसी प्रकार आप सनातन की मूल आधार भगवती गोमाता को बचाए रखने के लिए या तो गो हत्या बंदी कानून बनवाएं अथवा अगर आपके सामने कोई वैश्विक अड़चन है तो आप वक्फ बिल की भांति भारत में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाकर उसे गौ के लिए संरक्षित करने के लिए एक बिल तो ले आईए ताकि भारत में एक भी गोवंश दर दर की ठाकरे नहीं खाएं क्योंकि देश का चार करोड़ गोवंश गोचर में कब्जा होने के कारण दर दर की ठोकर खा रहा है । *स्वामीजी ने बताया कि उपसंहार उत्सव में ग्वाल प्रशिक्षण शिविर, पंचगव्य उत्पाद शिविर,एवं बहिनों के लिए आत्म रक्षा शिविर विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें है और आगामी 09 अप्रैल से 11 अप्रैल तक तीन दिवसीय गो आधारित कृषि का प्रशिक्षण वर्ग रहेगा* उपसंहार उत्सव के पंचम दिवस पर उज्जैन जिले से किशोर मेहता पलवा निवासी पूर्व जिला सहकारी बैंक उपाध्यक्ष निवासी,रामसिंह जादौन किठोदा निवासी पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष ,मुकेश मेहता भाजपा मंडल महामंत्री घटिया उज्जैन एवं आगर जिले के भाजपा जिला महामंत्री डॉ. गजेन्द्र सिंह चंद्रावत सुसनेर आदि अतिथि उपस्थित रहे । एक वर्षीय गोकृपा कथा के उपसंहार उत्सव के पंचम दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के बडौद से श्रीमती जतन बाई,प्रभु सूर्यवंशी,सुसनेर तहसील के बढ़िया से डॉ मांगी लाल , सालरिया से भेरू सिंह एवं मेनपुर से आचार्य रोडू सिंह आदि ने अपने परिवार के साथ सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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