: वर्ष 2021 के राज्य स्तरीय खेल पुरस्कारों की घोषणा
Sun, Nov 20, 2022
बलवीर सिंह कुशवाहा को लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड,
मुजाहिद बेग को मिलेगा स्व.श्री प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार,
खिलाड़ियों को मिलेगी दोगुनी पुरस्कार राशि
मध्यप्रदेश के वर्ष 2021 के राज्य स्तरीय खेल पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। प्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और विशिष्ट योगदान के लिए खेल हस्तियों को क्रमशः विक्रम, एकलव्य, विश्वामित्र, स्वर्गीय श्री प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार एवं लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिए जाते हैं। खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया की पहल पर वर्ष 2021 के लिए राज्य स्तरीय खेल पुरस्कारों के लिए चयनित खिलाड़ियों को दोगुनी पुरस्कार राशि दी जाएगी। एकलव्य पुरस्कार के लिए चयनित खिलाड़ियों को एक लाख रूपये, विक्रम, विश्वामित्र, स्व. श्री प्रभाष जोशी और लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए प्रत्येक को 2 लाख रूपये दिए जाएंगे। पूर्व में एकलव्य पुरस्कार जीतने वाले खिलाड़ियों को 50 हज़ार रूपये और अन्य सभी पुरस्कारों के लिए एक लाख रूपये (प्रत्येक) दिए जाते थे।
एकलव्य पुरस्कार
राज्य स्तरीय एकलव्य पुरस्कार में वर्ष 2021 के लिए 9 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। इसमें भोपाल की सॉफ़्ट टेनिस खिलाड़ी अंशिका कनौजिया, इंदौर की कयाकिंग केनोइंग खिलाड़ी शिखा चौहान, देवास की कुश्ती खिलाड़ी पूजा, अशोक नगर की वूशू खिलाड़ी श्रुति सरवैया, होशंगाबाद के शूटिंग खिलाड़ी अर्जुन ठाकुर, इंदौर की तैराक कन्या नैय्यार, विदिशा के एथलीट इकराम अली ख़ान, देवास के रोइंग खिलाड़ी गोपाल ठाकुर और भोपाल की शूटिंग बॉल खिलाड़ी सिद्धि छतवानी शामिल है।
विक्रम पुरस्कार
वर्ष 2021 के विक्रम पुरस्कार के लिए व्यक्तिगत खेलों में होशंगाबाद की सॉफ़्ट टेनिस खिलाड़ी आध्या तिवारी, इंदौर की तैराक एनी जैन, धार की कयाकिंग -केनोइंग खिलाड़ी आरती नाथ, भोपाल की शूटिंग खिलाड़ी मनीषा कीर, इंदौर की घुड़सवार सुदीप्ति हजेला, इंदौर के योगा खिलाड़ी रोहित वाजपेयी और इंदौर की बेडमिंटन खिलाड़ी श्रेयांशी परदेशी का चयन किया गया है।
विक्रम पुरस्कार की दलीय खेलों की श्रेणी में जबलपुर के खो-खो खिलाड़ी नैन्सी जैन, इंदौर की कबड्डी खिलाड़ी कंचन ज्योति दीक्षित और देवास की सॉफ़्ट बॉल खिलाड़ी रागनी चौहान का चयन किया गया है। दिव्यांग श्रेणी में भोपाल की जूडो खिलाड़ी पूनम शर्मा (ब्लाइंड) को वर्ष 2021 के विक्रम पुरस्कार के लिए चुना गया है।
वर्ष 2021 के साहसिक खेलों की श्रेणी में विक्रम पुरस्कार के लिए वर्ष 2016 में सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट पर आरोहण करने वाले दो उत्कृष्ट पर्वतारोही श्री भगवान सिंह कुशवाहा और श्री रत्नेश पाण्डेय के नामों की घोषणा की गयी है।
विश्वामित्र पुरस्कार
खेल प्रशिक्षकों को सम्मानित करने के लिए राज्य सरकार विश्वामित्र पुरस्कार देती है। वर्ष 2021 के लिए ग्वालियर के कराते प्रशिक्षक श्री पारितोष शर्मा, भोपाल के कुश्ती प्रशिक्षक श्री विनय प्रजापति और उज्जैन के मलखंभ प्रशिक्षक श्री मोहनलाल बमबोरिया को विश्वामित्र पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।
स्व. प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार
पारंपरिक खेल मलखंभ में उत्कृष्टता के लिए दिये जाने वाले प्रभाष जोशी खेल पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए उज्जैन के मुजाहिद बेग का चयन किया गया है।
लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
वर्ष 2021 के राज्य स्तरीय लाइफ़टाइम अचीवमेंट पुरस्कार की श्रेणी में ग्वालियर के श्री बलबीर सिंह कुशवाहा का चयन किया गया है। श्री कुशवाह ने प्रदेश में टेबल टेनिस, कयाकिंग केनोइंग, ड्रेगन बोट आदि खेलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
: प्रतिज्ञा का 365 दिन पालन करना चिकित्सक का दायित्व: राज्यपाल श्री पटेल
Sun, Nov 20, 2022
जीवन की सफलता सेवा भाव के साथ कर्त्तव्य पालन में
भाभा डेंटल कॉलेज साईंसेज दीक्षांत समारोह सम्पन्न
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन की सफलता सेवा भाव के साथ कर्त्तव्य पालन में हैं। दीक्षांत शपथ को 365 दिन याद रखें। चिकित्सक के रूप में प्रतिज्ञा के प्रत्येक शब्द के अनुरूप आचरण भावी जीवन की सफलता का पथ है। राज्यपाल श्री पटेल आज भाभा कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज में उपाधि वितरण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि मुख सम्बंधी स्वास्थ सम्पूर्ण स्वास्थ का महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण मुद्दा हैं। दाँत नहीं तो स्वाद नहीं की मान्यता पाचन क्रिया में दाँतों की महत्ता को बताती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक का सबसे प्रमुख कर्त्तव्य रोगी को शारीरिक और मानसिक रूप से तंदुरुस्त करना होता है। किसी भी चिकित्सक का कार्य मात्र शरीर की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल करना ही नहीं है। रोग की उत्पत्ति शरीर के भीतर किस प्रकार से होती है, उसके कारणों को भी जानना और समझना आवश्यक है। रोगों के विकारों को दूर करने के कार्यों के साथ ही निरंतर अध्ययन, शोध और अनुसंधान जरूरी है। रोगियों को उपचार के साथ ही रोग निदान और रोग नियंत्रण के सम्बन्ध में उचित परामर्श देना चिकित्सक का दायित्व है।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि रोग उपचार से अधिक प्रभावी रोगों की रोकथाम के प्रयास होते है। जरूरत मुख स्वास्थ्य और स्वच्छता के सम्बंध में जागरूकता का प्रसार करना है। उन्होंने स्कूलों और ग्रामीण अंचल में जागरूकता शिविर लगाने और मुख स्वास्थ्य रोग निवारक और रोग आधारित उपचार की जरूरतों के लिए एक समग्र मॉडल का विकास करने की जरूरत बताई। विश्वविद्यालयों से कहा कि शिक्षा के प्रसार के साथ विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, कर्त्तव्यबोध, नैतिक मूल्य विकसित करने, उन्हें सामाजिक सरोकारों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाये।
चेयरमेन भाभा ग्रुप डॉ. सुनील कपूर ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा अभी तक 110 पेंटेंट पंजीकृत कराने में सफलता प्राप्त की है। एक ऐसे रोबोट का निर्माण किया है जो 18 प्रकार की जाँच कर, 5 मिनट में रिपोर्ट दे देता है। भाभा विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. साधना कपूर ने विश्वविद्यालय के संबध में जानकारी दी। विद्यार्थियों को प्राचार्य भाभा कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज श्री मनोज मित्तल ने दीक्षांत शपथ ग्रहण कराई। श्री सिद्धार्थ अवस्थी ने आभार माना। पी.जे कलाम विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रुति कपूर, भाभा विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति दिलीप कुमार डे सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ, पालक और शिक्षक मौजूद थे।
: किसान भाई डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके काम्पलेक्स उर्वरक का उपयोग करें
Sun, Nov 20, 2022
किसान भाई डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके काम्पलेक्स उर्वरक का उपयोग करेंनरसिंहपुर, 20 नवम्बर 2022. वर्तमान में जिले में रबी फसलों की बोनी जोरो पर है। जिले में गेहूं एक लाख 10 हजार हेक्टर, चना 88 हजार हेक्टर, मसूर 35 हजार हेक्टर, मटर लगभग 20 हजार हेक्टर एवं गन्ना 61 हजार हेक्टर में बोनी किया जाना प्रस्तावित है। जिले में चना एवं मसूर की लगभग 70 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। गेहूं की बोनी अब जोरो पर पर है, अभी 35 प्रतिशत तक गेहूं की बोनी हो गई है, गेहूं की बोनी आगामी 15 दिवस में किसान भाई अधिकांशत: करने की स्थिति में हैं। गन्ना जिले में माह- नवम्बर से शुरूआत होकर माह मार्च-फरवरी तक होता रहा है। यह जानकारी उप संचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी ने दी है। उप संचालक कृषि ने बताया कि किसान भाई डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके काम्पलेक्स उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं। जिले में रबी फसल बोनी को दृष्टिगत रखते हुए पर्याप्त मात्रा रासायनिक खाद का भण्डारण कराया गया है जिसमें यूरिया 12463 मी.टन भण्डारण करते हुए 9017 मी.टन वितरण किया गया है, वर्तमान में 3445 मी.टन यूरिया जिले में उपलब्ध है। इसी प्रकार डीएपी 5515 मी.टन का भण्डारण करते हुए 4758 मी.टन का वितरण किया गया है तथा 756 मी.टन डीएपी शेष है। जिले में एनपीके की 800 मी.टन वितरण करते लगभग 2000 मी.टन शेष है। इसी प्रकार लगभग 4000 मी.टन एसएसपी भी जिले में उपलब्ध है। अभी वर्तमान में डीएपी की उपलब्धता जिले में कम है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से डीएपी के बेहतर विकल्प के रूप में 20:20:0:13 एवं एसएसपी भी पर्याप्त भण्डारण है। किसान भाईयों को सलाह है कि 3 बोरी एसएसपी एवं 17 किग्रा यूरिया का मिश्रण करने पर एक बोरी डीएपी के बराबर तत्व की पूर्ति हो जाती है। साथ ही दलहनी फसलों हेतु यह डीएपी से बेहतर विकल्प है, क्योकि इसमें 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा भी फसल को अतिरिक्त मिलती है। इसी प्रकार 20:20:0:13 के उपयोग से भी फसलों अतिरिक्त रूप से सल्फर की पूर्ति होती है। सल्फर दलहनी फसलों की जडो में राइजोबियम की गठान में वृद्धि करता है जो जमीन में नाइट्रोजन की पूर्ति में सहायक होती है जिसमें मिटटी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। इसी प्रकार गेहूं की बोनी करते समय 15:15:15 का एनपीके भी किसान भाईयों के लिए पर्याप्त मात्रा में भण्डा्रण कराया गया है। किसान भाई 2 बोरी 15:15:15, 1 बोरी एसएसपी एवं 1 बोरी यूरिया के मिश्रण को प्रति एकड बोनी के समय बेसल डोज के रूप में डालने पर उत्पादकता में वृद्धि होगी। इसी प्रकार गन्ने की फसल में भी बेसल डोज के रूप में 2 बोरी 15:15:15 एवं 2 बोरी एसएसपी को गन्ने में बेसल डोज के रूप में उपयोग करने पर डीएपी की आवश्यकता नहीं पडेगी, अपितु उससे बेहतर विकल्प के रूप में कारगार रहेगा।