: गिजूभाई बधेका: बच्चों के गांधी
Mon, Jun 23, 2025
गिजूभाई बधेका: बच्चों के गांधी
(आलेख - सुशील शर्मा)
भारतीय शिक्षा के इतिहास में गिजूभाई बधेका का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उन्हें "बच्चों का गांधी" कहा जाता है, और यह उपाधि उन्होंने बाल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए अपने क्रांतिकारी और दूरदर्शी कार्यों से अर्जित की। उनका मानना था कि बच्चों को भय और दंड से मुक्त एक आनंदमय वातावरण में सीखना चाहिए, जो उस समय की प्रचलित कठोर शिक्षण पद्धतियों के बिल्कुल विपरीत था। गिजूभाई ने 20वीं सदी की शुरुआत में प्रचलित रटंत विद्या और अनुशासन-केंद्रित शिक्षा का पुरजोर विरोध किया। वे समझते थे कि यह प्रणाली बच्चों के स्वाभाविक विकास और रचनात्मकता को कुचल देती है। उनका मानना था कि हर बच्चा अद्वितीय है और उसे अपनी गति से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। गिजूभाई ने मोंटेसरी शिक्षा पद्धति को भारत में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने की अवधारणा को बढ़ावा दिया। उनके विद्यालय, जिसे उन्होंने "बाल मंदिर" कहा, एक ऐसी जगह थी जहाँ बच्चे खुशी से आते थे, खेलते थे और प्रयोग करते हुए ज्ञान प्राप्त करते थे। उन्होंने शिक्षण को नीरस व्याख्यान से हटाकर रोचक गतिविधियों, कहानियों और खेल में बदल दिया। गिजूभाई केवल बच्चों की शिक्षा के बारे में ही नहीं सोचते थे, बल्कि उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी नई दिशा दी। उनका मानना था कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि बच्चों के मित्र, मार्गदर्शक और सहयोगी होने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों के मनोविज्ञान को समझने और उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के अनुसार शिक्षण विधियों को अनुकूलित करने के लिए प्रोत्साहित किया।मातृभाषा में शिक्षा के समर्थक: उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा मिलनी चाहिए, क्योंकि यह सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाती है। उनका मानना था कि अपनी भाषा में सीखने से बच्चे अपनी संस्कृति और जड़ों से भी जुड़े रहते हैं। गिजूभाई ने बाल साहित्य और शिक्षाशास्त्र पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जिनमें "दिवास्वप्न" (दिन के सपने) और "बालदेवो भव" (बच्चे भगवान का रूप हैं) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी कृतियाँ आज भी शिक्षकों और माता-पिता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।गिजूभाई बधेका ने भारतीय शिक्षा को एक नई दिशा दी। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के केंद्र में रखा और दिखाया कि कैसे सीखने को एक आनंदमय और रचनात्मक अनुभव बनाया जा सकता है। उनका दर्शन आज भी प्रासंगिक है और आधुनिक शिक्षा प्रणालियों में समावेशी और बाल-केंद्रित दृष्टिकोणों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। वे वास्तव में भारतीय शिक्षा के एक सच्चे पथ प्रदर्शक थे।आज उनकी पुण्यतिथि है विनम्र श्रद्धा सुमन अर्पित हैं। ✒️सुशील शर्मा✒️
: गाडरवारा,अखिल भारतीय कौरव महासभा ने दसवीं एवं बारहवीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया
Sun, Jun 22, 2025
गाडरवारा,अखिल भारतीय कौरव महासभा ने दसवीं एवं बारहवीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कियागाडरवारा।अखिल भारतीय कौरव महासभा द्वारा कक्षा 10 और 12 में अध्यन कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिले के कौरव समाज के लगभग 130, बच्चो को सम्मानित किया गया,कार्यक्रम में महासभा के अध्यक्ष राव पवन सिंह कौरव,राव बीरेंद्र सिंह कौरव,विश्वनाथ सिंह पटेल विधायक, सहित संरक्षक मंडल के वरिष्ठ सदस्य,मंडल अध्यक्ष ,महासभा के पदाधिकारी,सहित अनेक सामाजिक जन और विधार्थी उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन सोमनाथ कौरव सचिव द्वारा किया गया , रि , शिक्षक गणेश कौरव द्वारा सामाजिक कार्यों हेतु 51 हजार रुपे की राशि प्रदान की गई, कार्यक्रम नमामि पेलेश गाडरवारा में आयोजित किया गया।
: गाडरवारा 1016 वे सप्ताह में कदम ने किया पोधा रोपण
Sun, Jun 22, 2025
1016 वे सप्ताह में कदम ने किया पोधा रोपण
गाडरवारा- लगातार 2006 से जन्मोत्सव पर पौधारोपण करती आ रही कदम संस्था का साप्ताहिक पौधारोपण अभियान का 1016 वें सप्ताह का पौधारोपण पलोटन गंज स्थित शक्तिधाम मंदिर के सामने बगीचा प्रांगण में संपन्न हुआ जिसमें - मुकेश जैन ( शांतिदूत ),श्रीमति संजु शर्मा, राममोहन शर्मा, कुमारी कनक विश्नोई , चिरंजीव अयान , कु.अनिका गुप्ता के जन्मदिवस पर एवं श्रीमती सुनीता संदीप स्थापक वीआरसी, श्रीमती विमला वेदप्रकाश बिश्नोई, श्रीमती ऊषा ओम प्रकाश पाराशर, श्रीमती विद्या संतोष विश्वकर्मा की शादी की सालगिरह पर पौधा रोपित हुआ ।जन्मदिवस व शादी की सालगिरह पर पौधा रोपित करने वाले सभी को कदम साथियों ने गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं दीं । इस अवसर पर कदम साथियों के अलावा नगर के गणमान्य नागरिकों की अभूतपूर्व उपस्थिति रही ।