मुनि श्री समता सागर महाराज के 44वें दीक्षा दिवस पर : देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महाराज के जीवन और संदेश को किया नमन
Aditi News Team
Tue, Sep 29, 2026
मुनि श्री समता सागर महाराज के 44वें दीक्षा दिवस पर गुरु भक्ति और साधना का स्मरण
देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महाराज के जीवन और संदेश को किया नमन
कुण्डलपुर। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज के 44वें दीक्षा दिवस के अवसर पर कुण्डलपुर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालुओं, विद्वानों और समाजजनों ने मुनि श्री के 44 वर्षों के संयममय जीवन, साधना और धर्म प्रभावना का स्मरण करते हुए उनके प्रति विनय एवं श्रद्धा समर्पित की। इस अवसर पर आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महाराज के जीवन, साधना और उनके द्वारा स्थापित गुरु परंपरा के आदर्शों को भी श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए आचार्य श्री के पूजन में अर्घ समर्पित किये ।
प्रवक्ता अविनाश जैन एवं कुण्डलपुर क्षेत्र प्रवक्ता जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय कवि चंद्रसेन जैन भोपाल ने किया। इस अवसर पर विदिशा की डॉ. शोभा जैन ने विनयांजलि प्रस्तुत की। वक्ताओं ने कहा कि मुनि श्री समता सागर महाराज का 44 वर्षों का संयममय जीवन तप, स्वाध्याय, गुरु भक्ति और आत्मसाधना की प्रेरक यात्रा है। उन्होंने गुरु के सान्निध्य में रहकर साधना के साथ धर्म प्रभावना के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया।
इस अवसर पर मुनि श्री समता सागर महाराज ने देशभर से आए श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए। गुरु के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “गुरु की कृपा से मैं बांसुरी बना।” उन्होंने इस भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस प्रकार बांसुरी स्वयं कोई स्वर उत्पन्न नहीं करती, बल्कि वादक के स्पर्श से उसमें मधुर स्वर प्रस्फुटित होते हैं, उसी प्रकार शिष्य के जीवन में गुरु की कृपा और मार्गदर्शन ही उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। गुरु ने उनके जीवन को साधना का माध्यम बनाया और जीवन में जो कुछ प्राप्त हुआ, वह गुरु की कृपा और आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शिष्य को अपने अहंकार को छोड़कर स्वयं को गुरु के हाथों में बांसुरी की तरह समर्पित कर देना चाहिए, तभी उसके जीवन से धर्म, संयम और आत्मकल्याण के स्वर प्रस्फुटित हो सकते हैं।
मुनि श्री ने आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु परंपरा से प्राप्त धार्मिक दायित्वों को आगे बढ़ाना उनका संकल्प है। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने जीवन से संसार को देह और आत्मा की भिन्नता का संदेश दिया। उनका जीवन त्याग, तप, संयम और आत्मजागरण का प्रत्यक्ष उदाहरण रहा। उनके मार्गदर्शन में अनेक मुनिराजों और ब्रह्मचारी भैयाओं ने आत्मकल्याण की साधना को आगे बढ़ाया।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधिमरण का स्मरण करते हुए मुनि श्री समता सागर महाराज भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को उन सौभाग्यशाली शिष्यों में मानते हैं, जिन्हें गुरु के अंतिम समय में उनके चरणों में रहने का अवसर प्राप्त हुआ। 18 फरवरी 2024 की मध्यरात्रि का स्मरण करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। गुरु के अंतिम क्षणों की स्मृति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भी भावविभोर कर दिया।
मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महाराज ने जिन संस्थाओं, प्रकल्पों, तीर्थ क्षेत्रों और धार्मिक कार्यों की नींव रखी, उन्हें आगे बढ़ाना उनके शिष्यों के साथ ही समाज की भी जिम्मेदारी है। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के नेतृत्व में इन कार्यों को गुरु की भावना, आदर्शों और मूल उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
दीक्षा दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं ने मुनि संघ के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन,चरण प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं विनय समर्पण किया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं, विद्वानों और समाजजनों की सहभागिता से कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय बना रहा। मुनि संघ द्वारा विन्याजलि प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में आयोजित संगीतमय मनमोहक प्रस्तुति कुमारी रोशनी कुमारी सेजल द्वारा ‘समता सिंधु गुरुनाम’ ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया। गुरु भक्ति से ओतप्रोत इस प्रस्तुति के दौरान श्रद्धालु आध्यात्मिक भावों में डूबे नजर आए। कुण्डलपुर में चातुर्मासरत मुनि संघ के ग्रहस्थ जीवन के परिवार जनों का कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी द्वारा सम्मान अभिनंदन किया गया।
मुनि श्री समता सागर महाराज के 44वें दीक्षा दिवस का यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा, संयम, साधना और आत्मकल्याण के उन मूल्यों को स्मरण करने का अवसर बना, जिनके प्रति जैन समाज निरंतर समर्पित रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने और धर्म प्रभावना के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ,पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई, सुधीर सिंघई, महामंत्री आरके जैन सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी सदस्यों की उपस्थिति रही।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
मुनि श्री समता सागर महाराज