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स्लीमनाबाद नर्मदा टनल: ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच भ्रष्टाचार की आहट, : 1750 करोड़ की परियोजना पर EOW का शिकंजा, CAG रिपोर्ट में 100 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत

Aditi News Team

Tue, Jul 21, 2026

स्लीमनाबाद नर्मदा टनल: ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच भ्रष्टाचार की आहट,

1750 करोड़ की परियोजना पर EOW का शिकंजा,

CAG रिपोर्ट में 100 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी के संकेत

प्रोजेक्ट पूर्णता के दौर में अनियमितता के आरोप

कटनी सहित विंध्य और महाकौशल के 6 जिलो की महत्वाकांक्षी और बहुप्रतीक्षित करीब 1750 करोड़ रुपये की बरगी डायवर्जन टनल परियोजना (नर्मदा टनल) का मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 17 जुलाई को निरीक्षण किया और इसकी पूर्णता को ऐतिहासिक पल बताया। लेकिन दूसरी ओर यह प्रोजेक्ट अब भारी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच के घेरे में आ गई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में लगभग 100 करोड़ रुपये की गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद EOW की टीम ने गत दि स्लीमनाबाद पहुंचकर मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।

800 करोड़ से बढ़कर 1750 करोड़ हुई लागत, ठेकेदार को अनुचित लाभ का आरोप

वर्ष 2008 में करीब 800 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से शुरू हुई यह नर्मदा टनल परियोजना समय बीतने के साथ लागत के मामले में लगभग 1750 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। CAG की रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के निष्पादन के दौरान नियमों को दरकिनार कर ठेकेदार को करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

CAG रिपोर्ट में रेखांकित प्रमुख अनियमितताएं:

* ठेकेदार को अनुचित लाभ*: बिना ठोस कानूनी व तकनीकी आधार के 53.04 करोड़ रुपये का सीधा फायदा पहुँचाया गया।

* डी-वॉटरिंग के नाम पर खेल*: टनल से पानी निकालने (डी-वॉटरिंग) के नाम पर 39.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

* ग्राउट ब्लॉक कार्य में मनमानी*: 13.24 करोड़ रुपये मूल्य का ग्राउट ब्लॉक कार्य नियमों के विरुद्ध दूसरी एजेंसी को सौंपा गया।

95 पेज की शिकायत और 18 दस्तावेजी सबूत

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता नीरज मिश्रा द्वारा वर्ष 2023 में EOW भोपाल और लोकायुक्त को 95 पेजों की एक विस्तृत शिकायत सौंपी गई थी, जिसके साथ 18 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य संलग्न किए गए थे।

शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप:

* अतिरिक्त व नियम विरुद्ध भुगतान, नियमों का उल्लंघन कर 25.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

* वसूली में लापरवाही*: बिजली लाइन शिफ्टिंग (17.33 लाख रुपये) और सड़क मरम्मत मदों में ठेकेदार से राशि वसूल नहीं की गई।

* बैंक गारंटी जब्त न करना*: निर्माण कंपनी द्वारा लंबे समय तक काम बंद रखने के बावजूद अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए उसकी बैंक गारंटी जब्त करने की कार्रवाई नहीं की गई।

* FIR की मांग:शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार पर FIR दर्ज करने की मांग की है।

EOW की स्लीमनाबाद में दस्तक, जुटाए जा रहे दस्तावेज

प्राप्त शिकायत और सीएजी की प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर EOW की जांच टीम ने गत दिनों स्लीमनाबाद स्थित परियोजना स्थल का मुआयना किया। टीम ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के स्थानीय कार्यालय से वित्तीय रिकॉर्ड, तकनीकी स्वीकृतियां और अनुबंध पत्र जब्त किए हैं। EOW अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अतिरिक्त भुगतान के लिए निर्धारित प्रक्रियात्मक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं।

NVDA का पक्ष:

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का तर्क है कि टनल निर्माण तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण और जटिल प्रक्रिया थी। भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण कई अतिरिक्त कार्य कराने पड़े और इन सभी कार्यों व अतिरिक्त भुगतानों के लिए शासन स्तर से नियमानुसार स्वीकृति प्राप्त की गई थी।

मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का कहना है कि

विगत दिनों कटनी प्रवास के दौरान जब प्रदेश के वरिष्ठ एवं प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से CAG रिपोर्ट और EOW जांच पर सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया।

"CAG की रिपोर्ट अगर किसी गड़बड़ी का दावा कर रही है, तो उसके पीछे निश्चित रूप से तथ्य होंगे। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच EOW और लोकायुक्त की टीमें कर रही हैं। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।" — राव उदय प्रताप सिंह ,कैबिनेट मंत्री

निष्कर्ष: EOW की जांच पर नजर

स्लीमनाबाद नर्मदा टनल न केवल कटनी जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सिंचाई और जल आपूर्ति की जीवनरेखा मानी जाती है। हालांकि, निर्माण में लगातार हो रही देरी और अब 100 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले के आरोपों ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरी रीज़न की निगाहें EOW की आगामी जांच रिपोर्ट और होने वाली संभावित वैधानिक कार्रवाइयों पर टिकी हुई हैं।

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परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मप्र

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