गुरु परंपरा समर्पण समारोह केवल आयोजन नहीं, : आचार्यों के प्रति समर्पण का पावन अनुष्ठान है: निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज
Aditi News Team
Tue, Oct 27, 2026
गुरु परंपरा समर्पण समारोह केवल आयोजन नहीं,
आचार्यों के प्रति समर्पण का पावन अनुष्ठान है: निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज
कुण्डलपुर। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में बड़े बाबा आदिनाथ भगवान की पावन धरा परआयोजित गुरु परंपरा समर्पण समारोह में गुरु निष्ठा, विनय, त्याग, सेवा और आचार्य परंपरा के प्रति समर्पण का संदेश गूंजा। समारोह में देशभर से आए दानवीरों, समाजसेवियों, धर्मप्रेमियों और समर्पित कार्यकर्ताओं ने आचार्य परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। दिनभर आयोजित धार्मिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों ने समारोह को आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक जागरण का स्वरूप प्रदान किया।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं कुण्डलपुर प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि समारोह का उद्देश्य केवल एक आयोजन संपन्न करना नहीं, बल्कि आचार्यों की गौरवशाली परंपरा के प्रति समाज में समर्पण, विनय और सेवा की भावना को मजबूत करना है। समारोह में संतों के मंगल प्रवचनों के साथ निबंध प्रतियोगिता, झांकी प्रतियोगिता, साधना शिविर, हथकरघा प्रकल्प और समाजसेवी कार्यकर्ताओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरु परंपरा समर्पण समारोह केवल आयोजन नहीं, बल्कि अपनी परंपरा के प्रति समर्पित भावनाओं का पावन अनुष्ठान है। जिस प्रकार कल्पवृक्ष विधान, इंद्रध्वज विधान, चौसठ ऋद्धि विधान अथवा सिद्धचक्र महामंडल विधान संपन्न करने पर श्रद्धालुओं को पुण्य और आनंद की अनुभूति होती है, उसी प्रकार इस समारोह में भी सभी को समर्पण और भक्ति की अनुभूति होनी चाहिए। यह आयोजन आचार्यों के प्रति श्रद्धा को व्यवहार में उतारने का अवसर है।महाराज श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की पंक्तियों का स्मरण करते हुए कहा, “बल मैं बालक हूं किस लायक, बोध कहां मुझमें स्वामी, तो गुणगण की स्तुति करने से पूर्ण बना तुम स्वामी।” उन्होंने पर्वत से निकलने वाली सरिता का उदाहरण देते हुए कहा कि नदी प्रारंभ में पतली धारा के रूप में बहती है, लेकिन आगे चलकर विशाल रूप धारण कर सागर में समा जाती है। इसी प्रकार समर्पण की छोटी-छोटी भावनाएं मिलकर व्यापक जनजागरण का रूप ले सकती हैं।
महाराज श्री ने बताया कि इस आयोजन की भावना आचार्य समयसागर जी महाराज के चरणों से प्रारंभ करने की थी। कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के प्रतिनिधियों ने भोपाल पहुंचकर आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया और कार्यक्रम के संबंध में निवेदन किया। आचार्य श्री ने कुण्डलपुर में आयोजन करने के लिए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। मुनि श्री ने इसे दस साधुओं का सौभाग्य बताते हुए कहा कि जब आयोजन का मंगलारंभ ही इतना आनंददायक रहा है, तो इसका समापन भी निश्चित रूप से मंगलकारी होगा। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक नगर और समाज में प्रतिवर्ष ऐसे आयोजन हों, ताकि गुरु परंपरा के प्रति समर्पण की भावना जन-जन तक पहुंचे।
समारोह में देशभर से आए दानवीरों और समाजसेवियों की भूमिका की सराहना करते हुए मुनि श्री ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के विचारों और प्रेरणा से अनेक परिवारों ने सेवा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। बिलहरा परिवार सहित अनेक समाजसेवी परिवार गौसेवा, साधना केंद्रों, सामाजिक गतिविधियों और धार्मिक प्रकल्पों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा समर्पण केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सेवा, त्याग और समाज के प्रति उत्तरदायित्व में दिखाई देता है।
महाराज श्री ने विभिन्न नगरों के कार्यकर्ताओं, जैन पंचायतों और युवाओं के प्रयासों की प्रशंसा की। दमोह से कुण्डलपुर पहुंची अहिंसा वाहन रैली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रियता और समाज के वरिष्ठजनों के अनुभव से धर्म का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित होता है। रैली के माध्यम से अहिंसा, धर्म और सामाजिक एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद देते हुए उनके परिश्रम और सेवाभाव की सराहना की।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज की स्वदेशी और श्रमसम्मान की भावना का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने हथकरघा प्रकल्प को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चरखा केवल सूत कातने का साधन नहीं, बल्कि देश के ताने-बाने को जोड़ने का प्रतीक है। जिस प्रकार चरखे ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वदेशी और स्वतंत्रता की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में भूमिका निभाई, उसी प्रकार आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपने विचारों, तप-साधना और त्याग से समाज को जागृत किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने अपने विचारों के माध्यम से देश को नई दिशा दी और समाज को आत्मनिर्भरता, स्वदेशी तथा अहिंसक जीवनशैली का संदेश दिया।समारोह की रचनात्मक गतिविधियों में निबंध प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। मुनि श्री ने बताया कि आयोजकों को प्रारंभ में दो-तीन सौ निबंध आने की अपेक्षा थी, लेकिन प्रतियोगिता में देशभर से 900 से अधिक निबंध प्राप्त हुए। उनकी जांच पूरी हो चुकी है और परिणाम तैयार कर लिया गया है। क्षु. श्री भास्वत सागर महाराज, ऐलकश्री आगत सागर महाराज और क्षु.श्री स्वस्तिक सागर महाराज ने प्रतियोगिता के कार्य में परिश्रम किया। ऐलकश्री तन्मय सागर महाराज ने विभिन्न क्षेत्र कमेटियों से संपर्क कर प्रतिभागियों को प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया। ऐलकश्री चैत्य सागर महाराज ने हथकरघा सहित विभिन्न प्रकल्पों की रूपरेखा तैयार करने में योगदान दिया, जबकि ऐलकश्री अपारसागर महाराज झांकी प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं में सक्रिय रहे। प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन में जैन-अजैन तथा महिला-पुरुष निर्णायकों को शामिल किया गया, जिससे व्यापक सहभागिता को प्रोत्साहन मिला।
हथकरघा प्रकल्प को आगे बढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं ने सहयोग की घोषणा की। आचार्य श्री की अनन्य भक्त एवं स्वाध्यायी श्राविका डॉ. मनीषा संजय जैन, अमेरिका ने एक हथकरघा देने की घोषणा की। वहीं कटनी के सिंघई महेश जी के सुपुत्र शैलेंद्र जी एवं दीपाली सिंघई परिवार ने दूसरे हथकरघे के लिए सहयोग की घोषणा की। मुनि श्री ने दानदाताओं के प्रति मंगल आशीर्वाद व्यक्त करते हुए कहा कि सहयोग से हथकरघा की मशीनें चलती रहें और शाकाहारी एवं अहिंसक वस्त्रों का प्रचार-प्रसार देशभर में हो।समारोह में साधना शिविर, धार्मिक गतिविधियों और प्रतिभागियों के उत्साह की भी सराहना की गई। निबंध एवं झांकी प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को गुरु परंपरा, अहिंसा, स्वदेशी और नैतिक जीवनमूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया। मुनि श्री ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी संतों, दानदाताओं,कार्यकर्ताओं और समाजबंधुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा उनके बताए मार्ग पर चलने में है। समर्पण की भावना जब व्यक्तिगत जीवन से निकलकर परिवार, समाज और राष्ट्र तक पहुंचती है, तभी गुरु परंपरा का गौरव निरंतर आगे बढ़ता है।
समारोह का संदेश स्पष्ट रहा कि आचार्यों की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए श्रद्धा के साथ सेवा, विनय, स्वदेशी, अहिंसा और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। कुण्डलपुर की पावन धरा पर आयोजित यह समर्पण अनुष्ठान समाज को इसी दिशा में प्रेरित करने का माध्यम बना। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर श्री भक्तामर महामंडल विधान एवं श्री आचार्य परमेष्ठी विधान,पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, रिद्धि कलश पूजन विधान का आयोजन किया गया। झांकी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान विद्यासागर गौरक्षा पवई, द्वितीय स्थान प्रतिभा मंडल पलंदी मंदिर दमोह, तृतीय स्थान आकांक्षा बजाज पटेरा को प्राप्त हुआ। सभी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। निबंध प्रतियोगिता में ए प्लस ग्रेड श्रुति प्रमोद सदलगे बेलगांव कर्नाटक, रिया जैन टड़ा, सरिता जैन प्रतिभास्थली जबलपुर, पलक जैन कुंडलपुर, रविंद्र जैन कुंडलपुर को प्राप्त हुआ ।ए ग्रेड प्रज्ञा संजय संगई अंजनगांव महाराष्ट्र ,रेनी राजेश जैन गोंदिया, डॉ. निशा जैन अंबाला पंजाब, डॉ.गौरक्ष चंद्रकांत महात्मे वर्धा महाराष्ट्र, आकृति जैन जबलपुर ,ऋतु जैन दमोह, रानी जैन जबेरा, अशिका ललितपुर, रोशनी छपारा, कृतिका लालबर्रा, सरिता जैसीनगर ,हर्षिता कुंडलपुर ,शुभा सिहोरा, पूर्वी टड़ा, अमित दमोह, सिनी गौरझामर, संजना रहली, नैंसी खितौला, अंकिता नागपुर को प्राप्त हुआ।
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अदिति न्यूज,(सतीश लमानिया)
निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज