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September 22, 2021
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दमोह,ज्ञान का अहंकार नहीं करना चाहिए- आर्यिका श्री पर्युषण पर दस दिवसीय बालिका संस्‍कार शिविर लगेगा

दमोह (हटा)। आज सामान्‍य लोग थोडा सा ज्ञान होने पर बहुत बडे ज्ञानी होने की बात प्रकट करने लगते है, तो यही उनका ज्ञान सिमटकर रह जाता है, ज्ञान का कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए, ज्ञान को सदैव अनुभव, सहज व सरलता से प्रकट करना चाहिए, कई बार तो विद्वान ज्ञानी पुरूष के सामने ऐसे प्रश्‍न आ जाते है कि उन्‍हे मौन रहना पडता है, यह बात आज आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्‍या आर्यिका रत्‍न गुणमति माता जी ने श्री पार्श्‍वनाथ दिगम्‍बर जैन बडा मंदिर में तत्‍वार्थ सूत्र की कक्षा में कही, उन्‍होने कहा कि सच्‍चा गुरू ही सच्‍चा ज्ञान दे सकता है, कभी कभी तो लोग ज्ञान का श्रेय लेने लगते है कि हमें इतनी अच्‍छी बुदि्ध प्राप्‍त है, अच्‍छे ज्ञान के लिए सदैव अपने माता पिता गुरू के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना चाहिए उन्‍हे धन्‍यवाद देना चाहिए कि आपकी प्रेरणा से हमने यह स्‍थान प्राप्‍त किया है,
कुछ लोग तो साधु संतो के तप, त्‍याग को सामान्‍य समझने लगते है, जब कुछ ही पल उनके उपवास, ध्‍यान, व्रत के आते है तो उन्‍हे पता चलता है कि त्‍याग- तपस्‍या क्‍या होती है, दुसरों के कार्यो पर अंगुली उठाना सरल है लेकिन इसके पहले यह भी आकंलन करे कि वह जो कार्य कर रहा है, उसमें हमारा क्‍या सहयोग रहा, उसके लिए हम क्‍या कर रहे है, अपने कार्य को कर्तव्‍य मानकर करें अपेक्षा का भाव आना दोषपूर्ण होता है,
आर्यिका श्री ने कहा कि आज छोटे छोटे बच्‍चे भी माता पिता को जबाव देने लगे है, विनयभाव का आभाव आ रहा है इसी उद्देश्‍य से संस्‍कार शिविर लग रहे है ताकि सभी समृद्धशाली, संस्‍कारवान व स्‍वस्‍थ्‍य रहे,
१० सितम्‍बर से पर्वराज पर्यूषण पर्व पर नगर में बालिका संस्‍कार शिविर के सा‍थ दस धर्म पर प्रवचन श्रृंखला का आयोजन किया गया है जिसमें सभी श्रृद्धालुओं से सहभागिता दर्ज कराकर पुण्‍य अर्जन करने का निवेदन चातुर्मास कमेटी एवं सकल जैन समाज के द्वारा किया गया है,

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